सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के लिए चारा एवं दवाईयां पर्याप्त उपलब्ध कराने के जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं। आपदा प्रबंधन के साथ ही डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग लगातार इसकी मॉनिटरिंग कर रहा है। हरा एवं सूखा चारा के साथ अन्य सभी जरूरी सुविधाएं पशुपालकों को उपलब्ध होगी।
पशुओं के लिए हरे चारे की कमी, दूषित पानी और संक्रमण का खतरा बढ़ने को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में पशु चारा और जरूरी दवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। जिलों को स्थानीय जरूरत के अनुसार चारा और दवाओं का प्रबंध करने के निर्देश दिए गए हैं।
बाढ़ग्रस्त गांवों में बड़ी संख्या में मवेशी किसानों की आजीविका का प्रमुख आधार हैं। ऐसे में पशुओं को सुरक्षित रखना किसानों के लिए भी बड़ी चुनौती बन गया है। लंबे समय तक पानी में रहने के कारण पशुओं में त्वचा रोग, बुखार, गलाघोंटू, लंगड़ी बुखार और अन्य संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।
वहीं, जलजमाव वाले क्षेत्रों में चारे की उपलब्धता प्रभावित होने से पशुओं के सामने भोजन का संकट पैदा हो गया है।
विभाग की ओर से प्रभावित प्रखंडों में सूखा चारा, भूसा, दाना और पशु आहार की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया जा रहा है।
जरूरत के अनुसार चारा दूसरे क्षेत्रों से मंगाकर बाढ़ प्रभावित इलाकों तक पहुंचाया जाएगा। इसके साथ ही पशु चिकित्सा केंद्रों और मोबाइल पशु चिकित्सा टीमें सक्रिय है, ताकि बीमार पशुओं का मौके पर ही उपचार किया जा सके।
बाढ़ के पानी के उतरने के बाद पशुओं में संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है। इसे देखते हुए पशु चिकित्सकों को टीकाकरण, दवा वितरण और पशुपालकों को जरूरी सावधानियों की जानकारी देने की जिम्मेदारी भी दी जा रही है। पशुपालकों से पशुओं को गंदा या दूषित पानी नहीं पिलाने और संभव हो तो ऊंचे एवं सूखे स्थान पर रखने की अपील की जा रही है।
सरकार का लक्ष्य है कि बाढ़ के कारण पशुधन को होने वाले नुकसान को न्यूनतम किया जाए। इसके लिए जिला स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का आकलन कर जरूरतमंद पशुपालकों तक चारा और दवाएं समय पर पहुंचाई जाएं, ताकि आपदा की स्थिति में किसानों की आर्थिक क्षति को भी कम किया जा सके।











