टिकट टेंपरिंग का पुराना खेल फिर सामने आने के बाद रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की जांच तेज हो गई है। समस्तीपुर जंक्शन पर मंगलवार को पवन एक्सप्रेस में टिकट जांच के दौरान चार यात्रियों के पास से टेंपरिंग किए गए रिजर्वेशन टिकट मिलने के बाद इस गिरोह के फिर सक्रिय होने का पुख्ता साक्ष्य आरपीएफ को मिल गया है।
मामला सामने आने के बाद जांच एजेंसियां 36 घंटे बीतने के बाद भी इस नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक नहीं पहुंच सकी है।
जांच में सामने आया कि अब रिजर्वेशन टिकट में भी छेड़छाड़ कर यात्रियों से मोटी रकम वसूली जा रही है। असली टिकट के नाम पर किराया लेने के साथ प्रति टिकट करीब दो हजार रुपये अतिरिक्त वसूले जा रहे हैं। पूछताछ में सामने आया कि मुंबई जाने वाले एक यात्री से करीब 9,300 के तत्काल टिकट के बदले 22 हजार रुपये लिए गए।
टिकट कथित तौर पर मधुबनी के एक ट्रेवल एजेंट ने उपलब्ध कराया था। समस्तीपुर आरपीएफ इंस्पेक्टर अविनाश करोसिया ने बताया पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाएगा। मुख्य सरगना की गिरफ्तारी के लिए दो से तीन टीमें गठित की गई हैं। समस्तीपुर के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त आशीष कुमार निगरानी कर रहे हैं।
दो वर्ष पहले मुजफ्फरपुर में भी दैनिक जागरण की ओर से टिकट टेंपरिंग का मामला उजागर करने के बाद यूटीएस हाल से चार जालसाज दर्जनों फर्जी टेंपरिंग टिकट बेचते गिरफ्तार किए गए थे। सभी आरोपित मुजफ्फरपुर के सरैया व पारू क्षेत्र के थे।
इसके बाद रांची के हटिया स्टेशन पर भी इसी गिरोह से जुड़े दो लोग जनरल टेंपरिंग टिकट के साथ पकड़े गए थे। दैनिक जागरण ने दरभंगा में टेंपरिंग टिकट मिलने का उद्भेदन किया। उसके बाद पांच टेंपरिंग टिकट जब्त कर कार्रवाई शुरू हुई तो जीआरपी ने दो जालसाजों को जेल भेजा। अन्य फरार बताए गए हैं।
बता दें कि समस्तीपुर जंक्शन पर पकड़े गए चार यात्रियों में दो पुरुष व दो महिलाएं है। इनमें मधुबनी निवासी मनीष कुमार की पहचान हुई है। यात्रियों ने स्वीकार किया कि टिकट एक बिचौलिये के माध्यम से लिया था।
आरपीएफ ने कथित टिकट एजेंट गुड्डू कुमार को भी आरोपित बनाया है। अब जांच एजेंसी पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह का नेटवर्क कितनी दूर तक फैला है। इसका मुख्य सरगना कौन है।










