पोस्ट-सेटलमेंट के बाद वस्तु व सेवा-कर (जीएसटी) के मद में बिहार को चालू वित्तीय वर्ष (2026-27) में अप्रैल से अगस्त तक 13870 करोड़ रुपये मिल चुके हैं। पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि से यह राशि आठ प्रतिशत अधिक है। पिछली बार अगस्त तक 12883 करोड़ रुपये मिले थे।
बहरहाल, चालू वित्तीय वर्ष में अकेले अगस्त में पोस्ट-सेटलमेंट के बाद 2684 करोड़ रुपये जीएसटी की प्राप्ति हुई है। प्री-सेटलमेंट में यह राशि 907 करोड़ रुपये थी। यानी कि सेंटलमेंट के बाद बिहार के हिस्से में अच्छी आवक हुई है। इससे वाणिज्य-कर विभाग उत्साहित है।
यह शानदार वृद्धि राज्य की मजबूत वित्तीय स्थिति और बढ़ती खपत को दर्शाती है। अक्टूबर से नवरात्र व दशहरा के साथ सांस्कृतिक आयोजनों का दौर शुरू होगा। तब एसजीएसटी से राजस्व की प्राप्ति में और वृद्धि की संभावना है।
बिहार में जीएसटी कलेक्शन बढ़ने के पीछे कई महत्वपूर्ण आर्थिक और ढांचागत कारण रहे हैं। जीएसटी-2.0 सुधारों के अंतर्गत रोजमर्रा के घरेलू सामानों, कपड़ों और आवश्यक दवाओं पर टैक्स की दरें कम की गईं। इससे बिहार के ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवारों में खरीदारी (खपत) में वृद्धि हुई है।
राज्य में छोटे व्यापारियों और व्यवसायों का बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण हुआ है, जिससे वे कर प्रणाली के दायरे में आए हैं। कर चोरी रोकने के लिए डेटा एनालिटिक्स और ई-वे बिल की सघन जांच ने राजस्व रिसाव को काफी कम किया है।











