आरटीआई में रिकॉर्ड गायब होने का बहाना नहीं चलेगा, पटना हाई कोर्ट ने चार सप्ताह में सूचना देने का दिया आदेश

पटना हाई कोर्ट ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकारी रिकॉर्ड फटे, अपठनीय या गायब होने का हवाला देकर नागरिक को सूचना देने से इनकार नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने कहा कि सरकारी अभिलेखों को सुरक्षित रखना राज्य की जिम्मेदारी है। रिकॉर्ड संभालकर रखने में हुई अपनी विफलता का लाभ राज्य नागरिक को सूचना देने से इनकार करने के लिए नहीं उठा सकता। जरूरत पड़ने पर पुराने अभिलेखों का पुनर्निर्माण कर सूचना उपलब्ध करानी होगी।

रिकॉर्ड नहीं मिला तो दोबारा तैयार करना होगा

न्यायाधीश राज कुमार की एकलपीठ ने सीवान निवासी मो. रिजवान की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता ने आरटीआई के तहत बरवर्दा और रजिस्टर-दो की प्रमाणित प्रति मांगी थी।

अधिकारियों ने सूचना देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि मूल अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं और मौजूद प्रतिलिपि फटी एवं अपठनीय है। हाई कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और संबंधित आदेशों को रद कर दिया।

एक तरफ रिकॉर्ड गायब, दूसरी तरफ फोटोकॉपी मौजूद

अदालत ने अधिकारियों के तर्क को विरोधाभासी माना। कोर्ट ने कहा कि एक तरफ मूल अभिलेख उपलब्ध नहीं होने की बात कही जा रही है, जबकि दूसरी तरफ उसकी फोटोकॉपी मौजूद होने की बात भी सामने आ रही है।

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति आरटीआई कानून की मूल भावना के अनुरूप नहीं है। नागरिक द्वारा मांगी गई सूचना को केवल रिकॉर्ड की खराब स्थिति का हवाला देकर रोका नहीं जा सकता।

बरवर्दा को कोर्ट ने माना सार्वजनिक दस्तावेज

हाई कोर्ट ने यह भी माना कि बरवर्दा एक सार्वजनिक दस्तावेज है। इसका इस्तेमाल दीवानी मुकदमों में साक्ष्य के तौर पर किया जा सकता है। इसलिए ऐसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों का सुरक्षित रखा जाना जरूरी है।

अदालत ने कहा कि यदि मूल रिकॉर्ड क्षतिग्रस्त हो चुका है या उपलब्ध नहीं है तो राजस्व अभिलेखों के आधार पर उसका पुनर्निर्माण किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में भी सुरक्षित किया जा सकता है।

चार सप्ताह में रिकॉर्ड खोजने का निर्देश

कोर्ट ने सीवान के जिला पदाधिकारी और अंचलाधिकारी को चार सप्ताह के भीतर संबंधित रिकॉर्ड की भौतिक खोज करने का निर्देश दिया। यदि रिकॉर्ड नहीं मिलता है तो उसका पुनर्निर्माण कराने को कहा गया है।

इसके बाद आवश्यकता के अनुसार दस्तावेजों को डिजिटाइज कर उनकी प्रमाणित प्रति याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।

कोर्ट के इस फैसले से आरटीआई के जरिए सरकारी रिकॉर्ड मांगने वाले नागरिकों के अधिकारों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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