Khagaria 5X Fisheries Mission: नदियों, धारों, विस्तृत चौर और मौन क्षेत्रों की प्रचुरता वाले खगड़िया जिले को अब राज्य का प्रमुख मत्स्य हब बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने ठोस कदम उठाया है। जिले की असीम प्राकृतिक और जलीय संभावनाओं का दोहन कर मछली उत्पादन को वर्तमान स्तर से पांच गुना (5X) तक बढ़ाने के लिए जिलाधिकारी (डीएम) के स्तर से ‘खगड़िया जिला समेकित मत्स्य विकास-सह-5X मत्स्य मिशन’ का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृति के लिए राज्य सरकार को भेजा गया है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक तरीकों से इतर आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर उत्पादन बढ़ाना, स्थानीय वैल्यू चेन तैयार करना और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खोलना है।
20 हजार हेक्टेयर जलक्षेत्र का समेकित उपयोग
जिले का भौगोलिक परिवेश प्राकृतिक जलस्रोतों से समृद्ध है। खगड़िया में लगभग 11,645 हेक्टेयर आर्द्रभूमि (वेटलैंड) है, जो जिले के कुल क्षेत्रफल का करीब आठ प्रतिशत हिस्सा है। नदियों, धाराओं, चौर एवं मौन को मिलाकर 20,000 हेक्टेयर से अधिक विस्तृत जलीय संसाधन उपलब्ध हैं।
वर्तमान में केवल 3200 हेक्टेयर में पालन
हालांकि, मौजूदा समय में मात्र 3,200 हेक्टेयर क्षेत्र में ही पारंपरिक तरीके से मछली पालन किया जा रहा है। 5X मिशन के तहत शेष अप्रयुक्त जलक्षेत्र को वैज्ञानिक प्रबंधन के दायरे में लाकर जिले को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
आधुनिक तकनीकों का समावेश
प्रस्ताव के अनुसार, उत्पादन बढ़ाने के लिए पेन कल्चर, केज कल्चर, बायोफ्लॉक और रिसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) जैसी उन्नत तकनीकों को धरातल पर उतारा जाएगा। गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज के लिए खगड़िया अभी तक मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल और दरभंगा की मंडियों पर निर्भर रहा है। इस निर्भरता को खत्म करने के लिए जिले में:
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02 आईएमसी (इंडियन मेजर कार्प) हैचरी,
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01 माइनर हैचरी, और
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01 कैटफिश हैचरी स्थापित करने की योजना बनाई गई है।
इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर सस्ता और पोषक दाना उपलब्ध कराने के लिए ‘फिश फीड मिल’, जल में ऑक्सीजन का स्तर बनाए रखने के लिए एरेटर और निरंतर जलापूर्ति सुनिश्चित करने हेतु सोलर पंपसेट को बढ़ावा दिया जाएगा।
उत्पादन से लेकर बाजार तक मजबूत होगी पूरी वैल्यू चेन
परियोजना में केवल मछली उत्पादन ही नहीं, बल्कि कटाई उपरांत प्रबंधन (पोस्ट-हार्वेस्ट) और मार्केटिंग की पूरी वैल्यू चेन तैयार करने का खाका खींचा गया है। इसके अंतर्गत:
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आधुनिक फिश लैंडिंग सेंटर, नई नावें और उन्नत जालों की व्यवस्था
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आइस प्लांट, कोल्ड स्टोरेज और वातानुकूलित (इंसुलेटेड/रेफ्रिजरेटेड) वाहन
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आधुनिक थोक व खुदरा मत्स्य बाजार, हाईटेक फिश कियोस्क और प्रोसेसिंग-सह-मूल्य संवर्धन इकाइयां
इन सुविधाओं के विकसित होने से मछलियों के भंडारण और परिवहन में होने वाले नुकसान से बचा जा सकेगा और प्रोसेस्ड उत्पादों के जरिए मत्स्य पालकों को अपनी उपज का बेहतर बाजार मूल्य मिल सकेगा।
सरकारी जलकरों का कायाकल्प और 2.5 लाख रोजगार का रोडमैप
जिले में कुल 490 सरकारी मत्स्य जलकर चिह्नित हैं, जिनमें से 180 जलकर सीधे मत्स्य विभाग के नियंत्रण में हैं। लंबे समय से उड़ाही और रखरखाव न होने से इनमें भारी गाद (सिल्ट) जम चुकी है, जिससे इनकी जलधारण क्षमता घट गई है।
प्रस्तावित योजना के अंतर्गत:
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इन जलकरों का डिजिटल सीमांकन कर गाद निकाली जाएगी और इनकी कनेक्टिविटी निकटवर्ती नदियों से बहाल की जाएगी।
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जिले के 1,276 निजी तालाबों को तकनीकी रूप से उन्नत किया जाएगा।
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करीब 8,000 हेक्टेयर में फैले विशाल चौर क्षेत्र को ‘मुख्यमंत्री समेकित चौर विकास योजना’ के साथ अभिसरण (कन्वर्जेंस) कर उपयोगी बनाया जाएगा।
3 लाख से अधिक लाभुकों को मिलेगा लाभ, राष्ट्रीय बोर्ड से वित्तीय सहयोग
इस समूची परियोजना के लागू होने से मत्स्य पालन, बीज उत्पादन, चारा निर्माण, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, परिवहन और विपणन में स्थानीय स्तर पर करीब 2.5 लाख प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। साथ ही जिले के तीन लाख से अधिक किसान, मछुआरे और उद्यमी लाभान्वित होंगे।
खगड़िया को ‘समेकित आर्द्रभूमि एवं नदीय क्षेत्र मत्स्य क्लस्टर’ के रूप में राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए राष्ट्रीय मत्स्यिकी विकास बोर्ड (NFDB) और केंद्र सरकार के मत्स्य पालन मंत्रालय से वित्तीय पोषण हासिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राज्य सरकार की अंतिम हरी झंडी मिलते ही इस महाअभियान को जमीन पर उतार दिया जाएगा।











