बिहार में होने वाले इथेनॉल को अब पेट्रोलियम के अलावा अन्य उद्योगों के इस्तेमाल के लिए भी बाहर भेजा जा सकेगा। उद्योग विभाग की मांग के बाद इसका निर्णय लिया गया है।
मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने बिहार से इथेनॉल बाहर भेजने की छूट देने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की है। इसे वित्त विभाग को भेजा गया है। वित्त विभाग से सहमति के बाद कैबिनेट की मंजूरी ली जाएगी।
विभागीय जानकारी के अनुसार, प्रदेश में होने वाले इथेनॉल में 12 कंपोनेंट (विकारक) मिलाकर उसे दूसरे प्रदेश भेजने की अनुमति दी जाएगी ताकि इसका इस्तेमाल शराब बनाने में न किया जा सके।
राज्य सरकार के इस निर्णय से इथेनॉल प्लांट को फायदा होगा। उनके उत्पादन के लिए बड़ा बाजार मिल सकेगा। किसानों को भी लाभ मिलेगा।
इथेनॉल संयंत्रों के हित में फैसला
अभी पेट्रोलियम कंपनियों के लिए निर्धारित इथेनॉल कोटा कम रहने से राज्य में इसका उत्पादन कम हो गया है। पेट्रोलियम कंपनियों के लिए इथेनॉल का कोटा उत्पादन से कम रहने के कारण कई इथेनॉल प्लांट पर संकट आ गया है।
इस कारण ही उद्योग विभाग ने मद्य निषेध विभाग से अन्य उद्योगों के लिए इथेनॉल बाहर भेजने की अनुमति देने का आग्रह किया था। बिहार में अप्रैल 2016 से शराबबंदी कानून लागू होने के बाद से इथेनॉल में बिना कंपोनेंट मिलाए इथेनॉल लाने और ले जाने की छूट नहीं है।











