अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC-ST) के आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ और उप-वर्गीकरण को लेकर छिड़ी बहस के बीच केंद्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने अपना पक्ष पूरी तरह साफ कर दिया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आरक्षण का मूल उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े वंचित व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना है, इसलिए क्रीमी लेयर और श्रेणियों के भीतर वर्गीकरण (Sub-categorization) की समीक्षा बेहद जरूरी है।
‘आरक्षण का लाभ सबसे निचले पायदान तक पहुंचे’
जीतन राम मांझी ने जोर देकर कहा कि आजादी के 78 वर्षों बाद भी दलित समुदाय की कई ऐसी जातियां हैं, जिन्हें शिक्षा, नौकरियों और सरकारी योजनाओं में उनकी आबादी और जरूरत के हिसाब से सही प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है।
‘इस्तीफे की मांग पर पलटवार’
विरोधी बयानों और इस्तीफे की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए जीतन राम मांझी ने कहा कि सामाजिक न्याय और सबसे गरीब दलितों के अधिकारों के लिए आवाज उठाना कोई अपराध नहीं है।
उन्होंने कहा कि जो लोग संपन्न हो चुके हैं, यदि वे क्रीमी लेयर का विरोध कर रहे हैं तो वे वास्तव में अति-पिछड़े और वंचित दलितों का हक मार रहे हैं।
जीतन राम मांझी ने कहा कि आरक्षण खत्म करने की बात कोई नहीं कर रहा है, बल्कि बात केवल इतनी है कि एक ही वर्ग के भीतर जो लोग लगातार आगे बढ़ते चले गए हैं, वे उन भाइयों की भी सुध लें जो दशकों से कतार में सबसे पीछे खड़े हैं।
उन्होंने कहा कि चूंकि उन्हें हमारे गरीब लोगों की परवाह नहीं है, वह गरीब लोगों को देखना नहीं चाहते, इसलिए उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।











