बिहार में जन्म और मृत्यु पंजीकरण के नियम बदले, एक वर्ष बाद रजिस्ट्रेशन के लिए SDM या DM की मंजूरी जरूरी

नगर निगम में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और फर्जीवाड़ा मुक्त बनाने के उद्देश्य से बड़ा बदलाव किया गया है।

केंद्र सरकार के निर्देश पर बिहार सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। इसके तहत जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026 को पूरे प्रदेश में लागू कर दिया गया है।

कानून में बड़े बदलाव

यह नया कानून एक अक्टूबर 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो चुका है। पहले केवल 30 दिन तक सामान्य पंजीकरण और एक साल तक की देरी पर जिला रजिस्ट्रार की अनुमति से प्रमाण पत्र निर्गत हो जाता था। लेकिन वर्ष 2026 के नए संशोधन ने इस व्यवस्था को दो स्तरों में बांटकर पहले से अधिक सख्त बना दिया है।

अधिकारियों की लिखित मंजूरी

स्थानीय नगर निगम और प्रखंड कार्यालयों को भी नए नियमों के अनुसार ही आवेदन स्वीकार करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।

जारी अधिसूचना के मुताबिक यदि किसी जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के एक वर्ष बाद लेकिन दो वर्ष के भीतर दी जाती है, तो उसका पंजीकरण अब विशेष प्रक्रिया के तहत ही होगा।

इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट (डीएम), उप-मंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) या उनके द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट के लिखित आदेश की आवश्यकता होगी।

सत्यता जांच और शुल्क

संबंधित अधिकारी पहले घटना की सत्यता का पूरा सत्यापन करेंगे और निर्धारित शुल्क जमा कराने के बाद ही पंजीकरण की अनुमति देंगे।

वहीं यदि जन्म या मृत्यु की सूचना दो साल बीत जाने के बाद दी जाती है, तो मामला और अधिक सख्त हो जाएगा।

ऐसी स्थिति में केवल अधिकार क्षेत्र वाले प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही पंजीकरण की कार्रवाई की जा सकेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *