चर्चित टेंडर घोटाला की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बार फिर तेज कर दी है। जांच के सिलसिले में आधा दर्जन आईएएस अधिकारियों को समन जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया गया है। अधिकारियों से अलग-अलग तारीखों पर पूछताछ की जानी है।
समन के बाद अब तक दो अधिकारी से पूछताछ की जा चुकी है। एक आईएएस अधिकारी से सोमवार को जबकि दूसरे अधिकारी से मंगलवार को घंटो पूछताछ की गई। ईडी की इस कार्रवाई को मामले की जांच के अगले चरण के रूप में देखा जा रहा है।
दरअसल, पटना हाई कोर्ट ने हाल ही में मामले की सुनवाई के दौरान जांच की दिशा और अब तक हुई कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। जिसके बाद ईडी ने आधा दर्जन वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को पूछताछ के लिए समन जारी किया है।
समन जारी होने के बाद सोमवार 26 अक्टूबर को महिला आईएएस अधिकारी से ईडी के अफसरों ने पटना स्थित कार्यालय में पूछताछ की थी।
इसी कड़ी में मंगलवार को श्रम संसाधन विभाग में तैनात (पहले नगर विकास एवं आवास विभाग में थे) एक आईएएस से करीब छह घंटे तक पूछताछ की गई।
गुरुवार और शुक्रवार को भी दो अलग-अलग आईएएस अधिकारियों को ईडी दफ्तर पूछताछ के लिए बुलाया गया है।
पूछताछ के दौरान जांच एजेंसी टेंडर प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं और मामले में संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। अधिकारियों से पूछताछ के बाद जांच में आगे की कार्रवाई की दिशा तय हो सकती है।
क्या कहा था हाई कोर्ट ने?
हाल ही में पटना हाई कोर्ट ने रिशुश्री की अग्रिम ज़मानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि ईडी याचिकाकर्ता को सरकारी टेंडरों में हेराफेरी के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग का मुख्य सूत्रधार बता रही है, लेकिन उपलब्ध तथ्यों से अदालत को ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता महज एक मोहरा है और असली सूत्रधार पर्दे के पीछे हैं।
ईडी ने अपने जवाब में बताया है कि उसने छह वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ विश्वसनीय जानकारी साझा की थी, जिसके बाद तीन अधिकारियों, मुमुक्षु चौधरी, तरणी दास और उमेश कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई।
जिसके बाद अदालत ने ईडी द्वारा छह वरिष्ठ अधिकारियों के नाम साझा किए जाने के बावजूद सभी को संबंधित प्राथमिकी में आरोपित नहीं बनाने पर सवाल उठाए थे।
क्या है मामला?
प्रवर्तन निदेशालय ने 27 मार्च 2025 को भवन निर्माण विभाग में तैनात मुख्य अभियंता तारिणी दास समेत आठ अधिकारियों के यहां छापा मारा था।
इस मामले की जांच के दौरान टेंडर को मैनेज करने की बात सामने आई थी। इस मामले में निजी कंपनी के कर्ताधर्ता रिशुश्री का नाम सामने आया था।
जिसके बाद ईडी ने जांच का दायरा बढ़ाया तो कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम सामने आए थे। इस मामले में दो आईएएस अफसरों को निलंबित (सस्पेंड) भी किया जा चुका है।










