जेल में बंद अतीक अहमद का ये बेटा बन गया मौलवी, भाई के जनाजे में खुद पढ़ाई नमाज

कानपुर हाईवे पर 6 अगस्त की सुबह हुए एक भीषण सड़क हादसे में माफिया अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान की मौत हो गई. शुरुआती वक्त में पुलिस इसे एक सामान्य सड़क हादसा मान रही थी.लेकिन जब मृतकों की पहचान उजागर हुई तो पूरे प्रयागराज से लेकर प्रदेश के सियासी और प्रशासनिक गलियारों में सनसनी फैल गई.

अतीक अहमद के पांच में से अब सिर्फ तीन बेटे हैं. हादसे की खबर मिलते ही जेल में बंद बड़े भाई उमर और अली का रो-रोकर बुरा हाल हो गया. कस्टडी पैरोल मिलने के बाद दोनों भाइयों ने कड़ी सुरक्षा के बीच अपने सबसे छोटे भाई को अंतिम विदाई दी.

झांसी-कानपुर हाईवे पर कैसे हुआ हादसा?

6 अगस्त की सुबह करीब 10 बजे झांसी-कानपुर हाईवे पर एक तेज रफ्तार क्रेटा कार जा रही थी. कार में कुल पांच लोग सवार थे. अचानक चालक ने वाहन से नियंत्रण खो दिया और कार सीधे डिवाइडर से जा टकराई.टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परख्च्चे उड़ गए. इस हादसे में अबान अहमद और सोनू की मौके पर ही मौत हो गई. जबकि जैद, उमर और एजाम गंभीर रूप से घायल हो गए. घायलों को तत्काल मेडिकल कॉलेज झांसी में भर्ती कराया गया. पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया.

पिता की कब्र के पास हुए सुपुर्द-ए-खाक

अबान को अंतिम विदाई तुरंत नहीं दी जा सकी क्योंकि उसके बड़े भाई मोहम्मद उमर और अली अहमद जेल में बंद थे. अदालत से कस्टडी पैरोल की इजाजत मिलने के बाद 8 अगस्त को प्रयागराज में अबान को सुपुर्द-ए-खाक किया गया. कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जेल से लाए गए दोनों भाइयों ने मस्जिद पहुंचकर अपने छोटे भाई के जनाजे को कंधा दिया और फूट-फूट कर रोए. अबान को उसके पिता अतीक अहमद की कब्र के ठीक बगल में दफनाया गया. मिट्टी देने की रस्म पूरी होने के बाद दोनों भाइयों को वापस जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया गया.

हथकड़ी में बड़े भाई उमर ने पढ़ाई जनाजे की नमाज

सुपुर्द-ए-खाक के दौरान सामने आए एक वीडियो ने सोशल मीडिया पर नई बहस को जन्म दे दिया है. वीडियो में दिख रहा है कि हाथ में हथकड़ी पहने और पुलिसकर्मियों के पहरे के बीच बड़ा भाई मोहम्मद उमर खुद जनाजे की नमाज पढ़ा रहा है.

सोशल मीडिया पर यह सवाल उठने लगा कि मौलवी की जगह उमर ने नमाज क्यों पढ़ाई? स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, अतीक अहमद ने अपने बेटों को कॉन्वेंट शिक्षा के साथ-साथ दीनी (धार्मिक) तालीम भी दिलवाई थी जिस वजह से उमर को जनाजे की नमाज का ज्ञान था और उसने खुद भाई की नमाज पढ़ाना चुना. हालांकि इस बात की कोई आधिकारिक या ठोस वजह सामने नहीं आई है.

अतीक परिवार की बदलती तस्वीर

जिस अतीक अहमद के परिवार का नाम कभी अपराध,सियासत और खौफ के लिए जाना जाता था आज उसी परिवार का सबसे छोटा बेटा एक सड़क हादसे का शिकार हो गया. जिस भाई की आखिरी विदाई के लिए परिवार जुटा, उसके दो बड़े भाई हाथों में हथकड़ी पहने पुलिस की निगरानी में पहुंचे. एक तरफ कानूनी शिकंजा और दूसरी तरफ अपनों को खोने का गम.जिंदगी ने अतीक के परिवार को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है जहां दबदबे की पुरानी कहानियां पीछे छूट गई हैं और सिर्फ एक परिवार की लाचारी और दुख सामने नजर आ रहा है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *