NEET-UG धांधली के मास्टरमाइंड डॉ. उज्ज्वल और डॉ. रविशंकर गिरफ्तार, 30 लाख का खेल; छापे में मिले चौंकाने वाले सबूत

इस साल मई में आयोजित नीट-यूजी और जून में हुई री-नीट यूजी परीक्षा में धांधली करने वाले गिरोह के कथित मास्टरमाइंड डॉ. उज्ज्वल राज और डॉ. रविशंकर उर्फ सम्राट को बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने पटना से गिरफ्तार किया है।

दोनों की निशानदेही पर गिरोह के सदस्य और डॉ. रविशंकर के भाई अश्विनी कुमार को भी गिरफ्तार किया गया है।

जांच में सामने आया है कि गिरोह असली अभ्यर्थी की जगह स्कालर बैठाने, बायोमीट्रिक सत्यापन में हेरफेर और फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने के जरिए नीट समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली करता था।

एमबीबीएस परीक्षा देने पहुंचे थे, वहीं से गिरफ्तारी

ईओयू के अनुसार, डॉ. उज्ज्वल राज को 11 अगस्त और डॉ. रविशंकर को 12 अगस्त को पटना स्थित आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में एमबीबीएस की पूरक परीक्षा के केंद्र के बाहर से गिरफ्तार किया गया।

दोनों नालंदा के पावापुरी स्थित महावीर इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज के एमबीबीएस फाइनल ईयर के विद्यार्थी हैं।

वे थर्ड ईयर की पूरक परीक्षा देने पहुंचे थे। स्थानीय जक्कनपुर थाना और विश्वविद्यालय प्रशासन के सहयोग से दोनों को पकड़ा गया।

डॉ. उज्ज्वल के पास से एक स्कार्पियो और नीट में फर्जी स्कालर बैठाने के लिए जुटाए गए 2.95 लाख रुपये बरामद किए गए।

जांच में उसका नाम नीट-यूजी 2024 में करीब सात फर्जी स्कालर बैठाने के मामले में भी सामने आया था।

उस मामले में वह पटना हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत पर है। ईओयू के अनुसार, उसकी पत्नी भी री-नीट की अभ्यर्थी थी।

12 से 30 लाख रुपये तक में होती थी स्कालर की सेटिंग

ईओयू की जांच के अनुसार, गिरोह परीक्षा फार्म भरने के समय ही अभ्यर्थी और स्कालर के बीच सेटिंग कर लेता था।

इसके लिए कुछ अधिकृत आधार एजेंटों और कामन सर्विस सेंटर संचालकों की मदद से असली अभ्यर्थी के स्थान पर फर्जी अभ्यर्थी का बायोमीट्रिक अपडेट कराया जाता था।

फोटो मिक्सिंग के जरिए बायोमीट्रिक सत्यापन की प्रक्रिया को चकमा देने की कोशिश होती थी।

इसके बाद परीक्षा केंद्र पर असली अभ्यर्थी की जगह स्कालर को बैठाया जाता था। जांच में प्रति अभ्यर्थी 12 से 30 लाख रुपये तक वसूले जाने की बात सामने आई है।

गिरोह केवल परीक्षा में स्कालर बैठाने तक सीमित नहीं था, बल्कि नीट काउंसिलिंग में नामांकन के लिए फर्जी आय, जाति और दिव्यांगता प्रमाणपत्र भी तैयार कराता था।

री-नीट में स्कालर के लिए वाहन तक कराते थे उपलब्ध

जांच में यह भी सामने आया है कि री-नीट परीक्षा के दौरान स्कालर के आवागमन की व्यवस्था तक गिरोह की ओर से की जाती थी।

इस तरह अभ्यर्थी से लेकर स्कालर के परीक्षा केंद्र तक पहुंचने और सत्यापन प्रक्रिया से गुजरने की पूरी व्यवस्था पहले से तैयार की जाती थी।

ईओयू अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और अभ्यर्थियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

भाई अश्विनी के ठिकाने से मिले कई परीक्षाओं के एडमिट कार्ड

डॉ. रविशंकर की निशानदेही पर उसके भाई अश्विनी कुमार को रामकृष्णानगर के संध्या हाइट अपार्टमेंट से गिरफ्तार किया गया।

इसके बाद ईओयू ने जकरियापुल के पास सुनैना अपार्टमेंट स्थित उसके किराये के फ्लैट में छापेमारी की।

अश्विनी सेल्स एग्जीक्यूटिव के रूप में काम करता है। उस पर गिरोह को लगातार सहयोग और संरक्षण देने का आरोप है।

छापेमारी में आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय की एमबीबीएस परीक्षा के खाली बुकलेट, एईडीओ, नीट, बीपीएसएससी और सीबीएससी आयोग समेत विभिन्न परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड मिले।

कई अभ्यर्थियों के स्कूल अंकपत्र, मूल प्रमाणपत्र, टीसी और दो लाख रुपये नकद भी बरामद किए गए। इसके अलावा विभिन्न बैंकों के करीब दो दर्जन ब्लैंक चेक मिले, जिन पर हस्ताक्षर के साथ बड़ी रकम अंकित थी।

पावापुरी और लखीसराय की प्राथमिकी से जुड़ी जांच

नीट-यूजी में धांधली को लेकर तीन मई को पावापुरी में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसके बाद 21 जून को री-नीट यूजी परीक्षा में धांधली के मामले में लखीसराय में प्राथमिकी दर्ज हुई।

दोनों मामलों की जांच के दौरान ईओयू को गिरोह की गतिविधियों और उसके सदस्यों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली।

ईओयू के अनुसार, नीट और री-नीट परीक्षा में धांधली के मामलों में अब तक 35 अभियुक्तों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

नई गिरफ्तारियों और बरामद दस्तावेजों के आधार पर जांच एजेंसी गिरोह के पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका खंगाल रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *