दिल्ली के जंतर मंतर पर आरक्षण सिस्टम के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन ने देर रात भारी सियासी और प्रशासनिक हलचल पैदा कर दी. जंतर-मंतर पर इकठ्ठा हुए प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए दिल्ली पुलिस,आरएएफ (RAF) और आईटीबीपी (ITBP) के जवानों को तैनात किया गया. जंतर-मंतर को छावनी में तब्दील किए जाने और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की तस्वीरों के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद माहौल गरमा गया.
देर रात बढ़ा तनाव और पुलिस की कार्रवाई
प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर डटे रहे और बाद में राजघाट की ओर कूच करने की कोशिश की जिसके बाद पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा. दिल्ली पुलिस का दावा है कि जंतर-मंतर पर इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी और आयोजकों को रामलीला मैदान जाने के लिए कहा गया था. अनुमति न होने के कारण पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को हटाया.
हम पीछे हटने वाले नहीं- हर्ष दुबे
आंदोलन के प्रमुख चेहरे के रूप में उभरे नीट एस्पिरेंट हर्ष दुबे ने सोशल मीडिया के माध्यम से आंदोलनकारियों को संबोधित किया और आंदोलन खत्म होने की खबरों को खारिज कर दिया. हर्ष ने कहा ‘हम पीछे हटने वाले नहीं हैं और न ही किसी दबाव में हैं. हमारी बात सरकार और पुलिस प्रशासन से सकारात्मक दिशा में चल रही है.’
क्या हैं आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें?
यह आंदोलन नीट पेपर लीक विवाद के दौरान शुरू हुआ था जो धीरे-धीरे आरक्षण समीक्षा की मांग में बदल गया.
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें
1.जातिगत आधार के बजाय आर्थिक स्थिति के आधार पर आरक्षण दिया जाए.
3.उच्च शिक्षा में समानता से जुड़े नियमों और आरक्षण व्यवस्था की पुनरीक्षा की जाए.
फिलहाल जंतर-मंतर पर पुलिस का सख्त पहरा है और बाहर से आने वाले प्रदर्शनकारियों को वापस लौटाया जा रहा है. जबकि आंदोलनकारी सरकार के जवाब का इंतजार कर रहे हैं.











