महंगाई थमने का नाम नहीं ले रही है। कभी चीनी तो कभी खाद्य तेल की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी से आम लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। कुछ दिन पहले चीनी की कीमतों में उछाल आने के बाद थोड़ी राहत मिली थी, लेकिन अब सरसों तेल के दाम में अचानक तेजी आ गई है।
पिछले एक माह के दौरान सरसों तेल की कीमत में 10 से 15 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हुई है। इससे आम लोगों की रसोई का बजट बिगड़ने लगा है।
कार्तिक माह में पर्व-त्योहारों की अधिकता के कारण घरों में पकवान और व्यंजन बनाने का सिलसिला बढ़ जाता है। ऐसे समय में सरसों तेल की कीमतों में हुई वृद्धि लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है।
बाजार में फिलहाल सरसों तेल 210 से 215 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है, जबकि एक माह पहले इसकी कीमत 195 रुपये प्रति लीटर थी। यानी महीने भर में प्रति लीटर 15 रुपये तक की बढ़ोतरी हो चुकी है।
सरसों तेल हर घर की रसोई की प्रमुख जरूरत है। ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों का घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है। गृहिणियों का कहना है कि रोजमर्रा के खाने-पीने के सामान की कीमतें बढ़ने से घरेलू खर्च संभालना मुश्किल हो रहा है।
250 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकता है सरसों तेल
सरसों तेल की कीमतों में आई तेजी को लेकर शहर के पुरानी गोदाम स्थित थोक विक्रेता अभिषेक भारद्वाज ने बताया कि पिछले एक माह के अंदर सरसों तेल के दाम में 10 से 15 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि हुई है।
बाजार में सरसों की उपलब्धता काफी कम हो गई है। किसान कीमतों में और वृद्धि होने की उम्मीद में सरसों की बिक्री कम कर रहे हैं। इसके कारण बाजार में सरसों की आवक प्रभावित हो रही है।
उन्होंने आशंका जताई कि आने वाले दिनों में सरसों तेल की कीमत 250 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती है। हालांकि, यह बाजार की मौजूदा स्थिति पर निर्भर करेगा।
सरकारी समर्थन मूल्य में वृद्धि का भी असर
सरसों तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे सरसों के सरकारी समर्थन मूल्य में वृद्धि को भी एक कारण बताया जा रहा है। थोक विक्रेताओं के अनुसार सरसों का सरकारी भाव पहले 6240 रुपये प्रति क्विंटल था, जो बढ़कर 6680 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। यानी प्रति क्विंटल 440 रुपये की वृद्धि हुई है।
इसका असर सरसों की खरीद और तेल उत्पादन की लागत पर पड़ रहा है। राजस्थान सरसों उत्पादन का प्रमुख केंद्र है। वहां से देश के विभिन्न हिस्सों में सरसों और सरसों तेल की आपूर्ति होती है।
राजस्थान में बड़ी संख्या में तेल मिलें संचालित हैं। वहां से होने वाली आपूर्ति और बाजार में सरसों की उपलब्धता का असर अन्य राज्यों में भी तेल की कीमतों पर पड़ता है।











