हर तीसरी हत्या के पीछे जमीन विवाद, गांवों में ज्यादा हो रहे खूनी संघर्ष; पटना में क्राइम का पूरा लेखा-जोखा

जमीन विवाद तेजी से हत्या की बड़ी वजह बनता जा रहा है। पटना जिले में होने वाली लगभग हर तीसरी हत्या के पीछे जमीन बंटवारा, कब्जा या रास्ते का विवाद सामने आ रहा है।

पिछले पांच वर्षों के पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच दर्ज 1,251 हत्या के मामलों में 417 सीधे तौर पर भूमि विवाद से जुड़ी थीं। वर्ष 2021 में भूमि विवाद में 48 लोगों की हत्या हुई थी।

इसके बाद 2022 में 55, वर्ष 2023 में 70, वर्ष 2024 में 88 और 2025 में अब तक हत्या के 67 मामले सामने आए हैं। पांच वर्षों में भूमि विवाद से जुड़ी हत्याओं में 33.33 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है।

गांवों में ज्यादा खूनी विवाद

भूमि विवाद से जुड़ी 72 प्रतिशत हत्याएं ग्रामीण इलाकों में हुईं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गांवों में खेत, मेड़, रास्ता और पुश्तैनी जमीन को लेकर सबसे ज्यादा विवाद होते हैं।

कृषि भूमि की बढ़ती कीमत और तेजी से हो रही प्लाटिंग ने भी तनाव बढ़ाया है। कई मामलों में अपने ही रिश्तेदार एकदूसरे के खिलाफ खड़े हो गए। आंकड़ों के अनुसार, 37 प्रतिशत मामलों में पारिवारिक बंटवारा हत्या की मुख्य वजह बना।

हत्या से पहले मिलती रही धमकी

जांच में यह बात भी सामने आई कि अधिकतर मामलों में हत्या से पहले दोनों पक्षों के बीच विवाद चल रहा था। कई मामलों में मारपीट, धमकी, फायरिंग या कब्जे को लेकर थाने में शिकायत भी हुई थी।

पिछले पांच वर्षों में जमीन विवाद से जुड़े हत्या के प्रयास के 214, गंभीर मारपीट के 486 और अवैध कब्जा के 392 मामले दर्ज हुए। लगभग 60 प्रतिशत मामलों में पहले से विवाद का रिकार्ड मौजूद था।

किसान परिवारों से जुड़े अधिकतर आरोपित

भूमि विवाद में गिरफ्तार या आरोपित बनाए गए लोगों में 61 प्रतिशत कृषि आधारित परिवारों से जुड़े हैं। वहीं, 68 प्रतिशत आरोपितों की उम्र 25 से 45 वर्ष के बीच रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जमीन की कीमत बढ़ने के साथ पारिवारिक और सामाजिक तनाव भी बढ़ रहा है। 29 प्रतिशत मामलों में म्यूटेशन विवाद मुख्य वजह बना, जबकि 17 प्रतिशत मामलों में एक ही जमीन पर कई लोगों ने दावा किया। इसके अलावा कई मामलों में गवाह मुकरने और समझौते की कोशिश से जांच प्रभावित हुई।

जान का खतरा हो तो तुरंत शिकायत करें

पटना पश्चिमी क्षेत्र के एसपी भानु प्रताप सिंह ने कहा कि जमीन विवाद में यदि किसी को जान का खतरा महसूस हो या धमकी मिल रही हो तो तुरंत थाने में शिकायत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हर शनिवार थानों में जनता दरबार लगाया जाता है, जहां दोनों पक्षों को बुलाकर विवाद सुलझाने का प्रयास किया जाता है।

पांच वर्षों के आंकड़े

वर्ष कुल हत्या भूमि विवाद में हत्या प्रतिशत (%)
2021 210 48 22.8%
2022 225 55 24.6%
2023 248 70 28.3%
2024 344 88 25.5%
2025 224 67 29.7%

अन्य प्रमुख आंकड़े

वर्ष हत्या का प्रयास गंभीर मारपीट अवैध कब्जा
2021 36 82 71
2022 39 91 76
2023 45 104 83
2024 42 98 79
2025 52 111 93

प्रमुख तथ्य

  • 72 प्रतिशत हत्या ग्रामीण क्षेत्रों में
  • 61 प्रतिशत आरोपित कृषि आधारित परिवारों से
  • 68 प्रतिशत आरोपित 2545 आयु वर्ग के
  • 37 प्रतिशत मामलों में पारिवारिक बंटवारा कारण
  • 29 प्रतिशत मामलों की जड़ म्यूटेशन विवाद
  • 17 प्रतिशत मामलों में एक जमीन पर कई दावेदार
  • 26 प्रतिशत केस में गवाह मुकर गए या समझौते की कोशिश हुई

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