इस हाई-वोल्टेज ड्रामे का खुलासा करते हुए सेना के एडमिन कमांडेंट कर्नल जे.एस. जगरान ने बताया कि यह फर्जी ब्रिगेडियर उनकी नजरों से बच नहीं पा रहा था. दरअसल अप्रैल के महीने से ही सेना की इंटेलिजेंस विंग को इस शख्स पर शक था. कर्नल जगरान कई बार इस फर्जी अफसर को देख चुके थे और उसकी तलाश में थे. लेकिन इसे रंगे हाथों पकड़ने के लिए सेना ने एक बेहद ही दिलचस्प जाल बुना.
कर्नल की ट्रैप में फंसा आर्यन वर्मा
घर पर भी लगा रखी थी ब्रिगेडियर की नेम प्लेट
जब सेना ने इस फर्जी ब्रिगेडियर की तलाशी ली तो अधिकारियों के भी होश उड़ गए.आर्यन वर्मा के पास से सेना का एक पहचान पत्र मिला जिस पर नकली सील लगी हुई थी. रौब गांठने के लिए वह अपनी कमर में एक नकली पिस्तौल खोंसकर घूमता था. आरोपी आर्यन वर्मा रोजा थाना क्षेत्र के दुर्गा एनक्लेव कॉलोनी का रहने वाला है. उसने हद तो तब कर दी जब अपने घर के बाहर भी बड़े-बड़े अक्षरों में ब्रिगेडियर आर्यन वर्मा नाम की नेम प्लेट टांग रखी थी ताकि पड़ोसियों और रिश्तेदारों पर धौंस जमा सके.इसके अलावा उसके पास से सेना से जुड़े कई फर्जी और संवेदनशील दस्तावेज भी बरामद हुए हैं.
बरेली से बुलाई गई स्पेशल विंग
जिस इलाके में यह फर्जी ब्रिगेडियर खुलेआम अपनी गाड़ी और बाउंसरों के साथ घूम रहा था, वह सेना का बेहद संवेदनशील जोन माना जाता है. यहां न सिर्फ भारतीय सेना की पूरी एक ब्रिगेड मौजूद है बल्कि चंद कदमों की दूरी पर ही जिले के डीएम और एसपी के वीवीआईपी आवास भी हैं.











