निशांत कुमार के सामने मरीजों ने खोली हेल्थ सिस्टम की पोल, स्वास्थ्य मंत्री ने तुरंत लिया एक्शन

राजवंशी नगर स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण (एलएनजेपी) हड्डी अस्पताल में मंगलवार को मरीजों को स्वास्थ्य मंत्री निशांत को उपचार में कमियां बताने का मौका मिला। स्वास्थ्य मंत्री निशांत दोपहर बाद औचक निरीक्षण करने पहुंचे थे।

करीब साढ़े तीन घंटे तक उन्होंने अस्पताल के वार्ड, ओपीडी, इमरजेंसी, रसोई, पैथोलाजी, नए भवन से लेकर पुरुष शौचालय तक का निरीक्षण किया और पसरी गंदगी पर नाराजगी जताई। इस क्रम में उन्होंने मरीजों से सीधे संवाद किया।

कई मरीजों ने शिकायत की कि अस्पताल में दवाएं नहीं मिलतीं, महंगी दवाएं बाहर से लानी पड़ती हैं। वहीं अस्पताल में जांच की सुविधा होने के बावजूद उन्हें डॉक्टर कक्ष में बैठे लोग निजी पैथोलाजी से जांच कराने के लिए कहते हैं। कई डॉक्टर वार्ड व ट्रायज में कई-कई दिन तक देखने नहीं आते हैं।

स्वास्थ्य मंत्री ने दिए सख्स निर्देश

स्वास्थ्य मंत्री ने ओपीडी के खराब एसी व ह्वील चेयर की कमी पर भी नाराजगी व्यक्त कर मरीजों की सुविधा से कोई समझौता नहीं करने का सख्त निर्देश दिया।

निरीक्षण के क्रम में डॉ. राकेश कुमार रोशन जिनकी दो बजे से ड्यूटी थी वे तीन बजे तक नहीं पहुंचे थे। फोन पर बात करने पर उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया।

विभाग के स्तर से उनसे स्पष्टीकरण करने का निर्देश दिया। इसी प्रकार अपने प्रिस्क्रिप्शन में बाहर से जांच कराने को लिखने वाले न्यूरो के डॉ. श्याम किशोर से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अस्पतालों में अब लापरवाही नहीं चलेगी। मरीजों को बेहतर उपचार सुविधाएं, समय पर जांच व जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि जो अधिकारी या कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाएंगे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उनके साथ स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि व विशेष सचिव डॉ. त्यागराजन एसएम बीएमएसआइसीएल के प्रबंध निदेशक सुब्रत कुमार सेन, स्वास्थ्य मंत्री के आप्त सचिव कौशलेंद्र कुमार व अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी थे।

अब 24 घंटे चलेगी पैथोलाजी, अनावश्यक बाहर नहीं भेजने का आदेश

स्वास्थ्य मंत्री ने मरीजों की शिकायत सुनने के बाद ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर व अन्य पैथोलाजी जांच में देरी पर भी चिंता व्यक्त की और 24 घंटे पैथोलाजी संचालित करने का निर्देश दिया। इसके लिए आवश्यक रेडियोलाजिस्ट, लैब टेक्नीशियन व अन्य पैरामेडिकल कर्मियों की संख्या बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रस्ताव विभाग को भेजने को कहा।

स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि ने निरीक्षण के दौरान चिकित्सकों को बिना एप्रन कार्य करते पाया। उन्होंने सभी को निर्धारित ड्रेस कोड का अनिवार्य रूप से पालन करने का निर्देश दिया।

स्वास्थ्य मंत्री ने मरीजों को भोजन उपलब्ध कराने वाली रसोई का निरीक्षण कर भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता, वितरण व्यवस्था आदि की जानकारी ली और निर्धारित मानकों के अनुरूप पौष्टिक भोजन समय पर देने का निर्देश दिया।

सफाई व्यवस्था, एसी-पंखे के साथ ह्वील चेयर उपलब्धता में तत्काल सुधार करने को कहा गया। निदेशक डा. राकेश चौधरी ने बताया कि पूर्व सफाई एजेंसी को हटा दिया गया है और 13 जुलाई से जीविका दीदी साफ-सफाई की जिम्मेदारी संभालेंगी।

इसके अलावा पैथोलाजी विभाग को 24 घंटे संचालित किया जाएगा ताकि इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की भी तत्काल जांच हो सके। स्वास्थ्य मंत्री ने 400 बेड के नए अस्पताल भवन का भी निरीक्षण किया। अस्पताल प्रशासन ने रैंप समेत कई तकनीकी कमियों की जानकारी दी।

इस पर उन्होंने बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कारपोरेशन लिमिटेड (बीएमएसआइसीएल) के प्रबंध निदेशक सुब्रत कुमार सेन ने बताया कि नए भवन का निर्माण कार्य अगस्त तक पूरा कर लिया जाएगा और सितंबर से यहां इलाज शुरू हो सकेगा।

बोली वृद्धा- ‘ए निशांत… कल से एक्स-रे के लिए बैठी हूं’

निरीक्षण के दौरान कई भावपूर्ण दृश्य सामने आए। भीड़ के बीच बैठी एक बुजुर्ग महिला ने तेज आवाज में स्वास्थ्य मंत्री को पुकारते हुए कहा, ए निशांत… ए निशांत… कल से एक्स-रे के लिए बैठी हूं।

वृद्धा की बात सुनते ही स्वास्थ्य मंत्री पलटकर उनके पास पहुंचे और हाथ से सहारा देकर उठाते हुए अधिकारियों के साथ एक्स-रे कराने के लिए अंदर भिजवाया।

इसी प्रकार एक युवक जिसके पैर नहीं था, उसने भी स्वास्थ्य मंत्री से कृत्रिम पैर लगवाने की गुहार लगाई। वार्ड में भर्ती मरीजों से भी जा-जाकर उन्होंने समस्याओं की जानकारी ली।

आनन-फानन में निदेशक ने दिए कई सख्त निर्देश

निदेशक डा. राकेश चौधरी ने स्वास्थ्य मंत्री के समक्ष जो समस्याएं सामने आईं, उनके निदान के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने 24 घंटे पैथोलाजी संचालित करने, अस्पताल में दवा नहीं होने पर ही बाहर से लिखने, बाहर से दवा मंगवाने पर जेनरिक नाम लिखने, ट्रायज व वार्ड में नियमित राउंड लेने के आदेश दिए।

उन्होंने कहा कि इसमें कोताही होने पर विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी। हालांकि, एक्स-रे के लंबे इंतजार पर उन्होंने नए भवन व उसमें नई मशीनों के आने के इंतजार की बात कही।

उन्होंने बताया कि प्रतिदिन औसतन 400 मरीज ओपीडी में आते हैं और 350 लोगों का एक्स-रे होता ही है। पुरानी कम क्षमता की मशीन इमरजेंसी रोगियों के लिए आरक्षित है, ऐसे में एक मशीन से 350 लोगों की जांच काफी जटिल है।

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