सिल्क सिटी भागलपुर में मंगलवार की शाम गंगा नदी के बीचों-बीच एक ऐसा नजारा दिखा, जिसे देखकर विक्रमशिला पुल पर गुजरने वाले राहगीरों की आंखें फटी की फटी रह गईं। दूर से देखने पर यह किसी देश की विशालकाय मिसाइल जैसा नजर आ रहा था, लेकिन हकीकत में यह इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) की परियोजना के लिए भेजा जा रहा एक बेहद भारी औद्योगिक उपकरण यानी ओवर डायमेंशन कार्गो (ODC) था।
मंगलवार शाम ठीक 5:27 बजे इस भीमकाय कार्गो ने भागलपुर के विक्रमशिला पुल के नीचे से सुरक्षित रूप से रास्ता पार किया। लेकिन यह सफर इतना आसान नहीं था, इस दौरान करीब दो घंटे तक अधिकारियों की सांसें अटकी रहीं।
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पुल के नीचे थमी रही रफ्तार, इंच-इंच नापी गई ऊंचाई
600 टन वजन का यह उपकरण इतना विशाल है कि विक्रमशिला पुल के नीचे से इसे गुजारना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। पुल के पास पहुंचते ही बार्ज (विशेष नाव) को करीब दो घंटे तक रोकना पड़ा। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) की टीम ने सुरक्षा के लिहाज से पुल की ऊंचाई (क्लीयरेंस) की बारीकी से जांच की। जब टीम आश्वस्त हो गई कि कार्गो पुल से नहीं टकराएगा, तब तीनों बार्ज को एक-एक कर बेहद सावधानीपूर्वक पुल के नीचे से निकाला गया।
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सड़क और रेल भी हुए फेल, तो गंगा मैया बनीं सहारा
इस अनोखे अभियान की सबसे खास बात यह है कि यह विशालकाय औद्योगिक उपकरण इतना भारी-भरकम और बड़ा है कि इसे देश के किसी भी नेशनल हाईवे, सड़क या रेलवे ट्रैक के जरिए ले जाना नामुमकिन था। यही वजह है कि इसे भेजने के लिए राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (गंगा नदी) को चुना गया। इस पूरे मूवमेंट की मॉनिटरिंग आईडब्ल्यूएआई के भागलपुर उप कार्यालय की टीम कहलगांव के बटेश्वर स्थान से ही लगातार कर रही थी।
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कोलकाता से सिमरिया तक… 800 किलोमीटर का सफर
यह ‘बाहुबली कार्गो’ अपनी तीन विशेष बार्ज के साथ बीती 25 जून को कोलकाता बंदरगाह से रवाना हुआ था। जलमार्ग के रास्ते करीब 800 किलोमीटर की लंबी और रोमांचक यात्रा तय करते हुए यह खेप सिमरिया (बेगूसराय) पहुंचेगी। अधिकारियों के मुताबिक, इसके 10 जुलाई के आसपास अपने अंतिम गंतव्य तक पहुंचने की उम्मीद है।











