किसान मजदूर मोर्चा ने पंजाब में ‘बिजली संकट’ को लेकर ‘चक्का जाम’ की चेतावनी दी

किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) कृषि क्षेत्र में चल रहे ‘बिजली संकट’ को लेकर पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) के अधिकारियों के खिलाफ राज्यव्यापी धरना दे रहा है।

केएमएम के संयोजक सरवन पंढेर ने कहा कि बिजली की भारी कमी के कारण धान की खेती बाधित हो गई है और किसानों को अपने खेतों की सिंचाई के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

मोगा में मुख्यमंत्री भगवंत मान के लोक मिलन कार्यक्रम में जा रहे किसानों को पुलिस ने हिरासत में लिए जाने के बाद तनाव और बढ़ गया।

पंढेर ने आरोप लगाया कि किसान प्रतिनिधिमंडल के दौरे के बारे में अधिकारियों को पूर्व सूचना देने के बावजूद उन्हें हिरासत में लिया गया।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार किसानों की आवाज को दबाना जारी रखती है, तो यूनियन ‘चक्का जाम’ लगाएंगी।

पंढेर ने कहा कि किसानों के प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री के लोक मिलन कार्यक्रमों में भाग लेना जारी रखेंगे और उनसे मौजूदा बिजली संकट के बारे में सवाल पूछेंगे।

उन्होंने आरोप लगाया कि कृषि के लिए बिजली की आपूर्ति घटकर सिर्फ चार घंटे रह गई है, जिससे किसानों को डीजल से चलने वाली मोटरें चलाने के लिए अपनी बचत खर्च करने या पैसे उधार लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

पंढेर ने दावा किया कि बिजली मंत्री और पीएसपीसीएल के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक के समक्ष इस मुद्दे को उठाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि किसानों को निर्बाध बिजली का आश्वासन दिया गया है, लेकिन वास्तव में कई क्षेत्रों को प्रतिदिन केवल ढाई से चार घंटे की आपूर्ति मिल रही है, जिससे धान के मौसम में सिंचाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

केएमएम ने कृषि के लिए कम से कम 16 घंटे की निर्बाध बिजली आपूर्ति और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 24 घंटे की आपूर्ति की मांग की। साथ ही 24 घंटे के भीतर खराब ट्रांसफार्मर को बदलने की भी मांग की गई है।

संगठन ने मांग की कि उपभोक्ताओं की सहमति के बिना स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक लगाई जाए, पुराने मीटरों को हटाने के बाद लगाए गए जुर्माने को वापस लिया जाए और पुराने मीटरों को फिर से लगाया जाए।

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