सरकार ने आठ संघ राज्य क्षेत्रों के उपराज्यपालों और प्रशासकों को नागर विमानन सुरक्षा के विरुद्ध विधिविरुद्ध अधिनियम, 1982 के विरुद्ध विधिविरुद्ध अधिनियमों के दमन के अंतर्गत राज्य सरकार की शक्तियों का प्रयोग करने और उनके कार्यों का निर्वहन करने के लिए प्राधिकृत किया है।
गृह मंत्रालय (एमएचए) ने 25 जून को जारी एक अधिसूचना के माध्यम से कहा कि राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 239 (1) के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए आदेश जारी किया है।
यह अधिसूचना केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, पुडुचेरी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, चंडीगढ़, लक्षद्वीप, लद्दाख, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव पर लागू होगी।
आदेश के तहत, इन केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल या प्रशासक शक्तियों का प्रयोग करेंगे और अधिनियम के तहत राज्य सरकार को सौंपे गए कार्यों का निर्वहन करेंगे। इन शक्तियों का प्रयोग राष्ट्रपति के नियंत्रण के अधीन और संबंधित केंद्र शासित प्रदेश पर अधिकार क्षेत्र वाले उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सहमति से किया जाएगा।
नागर विमानन सुरक्षा के विरुद्ध विधिविरुद्ध अधिनियम, 1982 में भारत में नागर विमानन की संरक्षा और संरक्षा को खतरा उत्पन्न करने वाले अपराधों से निपटने के लिए कानूनी ढांचा प्रदान किया गया है।
चूंकि संघ राज्य क्षेत्रों में सामान्यत राज्य सरकारें नहीं होती हैं, इसलिए अधिसूचना उनके प्रशासकों या उपराज्यपालों को अधिनियम के अंतर्गत राज्य सरकार की सांविधिक शक्तियों का प्रयोग करने के लिए प्राधिकृत करती है। यह व्यवस्था अगले आदेश तक लागू रहेगी।
अधिसूचना 25 जून को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित की गई थी।











