गाजियाबाद की एक विशेष अदालत ने रविवार को समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
खान के वकील दानिश अली ने संवाददाताओं को बताया कि जौहर ट्रस्ट से जुड़े धनशोधन मामले में सपा के वरिष्ठ अधिकारी को विशेष गाजियाबाद अदालत में पेश किया गया।
यह आदेश विशेष अदालत के न्यायाधीश अवनीश कुमार पांडे ने दिया।
खान के वकील ने बताया कि सपा के दिग्गज नेता गाजियाबाद की डासना जिला जेल में 14 दिन बिताएंगे।
इससे पहले, खान को भारी सुरक्षा के बीच अदालत लाया गया था क्योंकि उनके समर्थक अपने नेता की एक झलक पाने के लिए परिसर के बाहर खड़े थे, जो पिछले कुछ वर्षों से उनके खिलाफ दर्ज कानूनी मामलों की एक श्रृंखला से जूझ रहे हैं।
खान ने राजनीतिक साजिश के हिस्से के रूप में इन मामलों को लगातार खारिज किया है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को खान को धनशोधन मामले में गिरफ्तार किया था, जब खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को कथित दोहरे पैन कार्ड मामले में जमानत पर रामपुर जेल से रिहा किया गया था।
वकील अली ने कहा कि उन्होंने अदालत को सूचित किया था कि इस मामले में धन शोधन रोकथाम अधिनियम की धारा 19 का उल्लंघन किया गया है।
उधर, ईडी के वकीलों ने आरोपी की हिरासत का पुरजोर अनुरोध किया।
जांच एजेंसी के वकीलों ने अदालत को सूचित किया कि आरोपी नेता से वित्तीय लेनदेन, बेनामी संपत्तियों के हस्तांतरण और पूरे मामले से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण सबूतों के बारे में पूरी तरह से पूछताछ करना आवश्यक था।
ईडी के वकीलों ने अदालत को सूचित किया कि निष्पक्ष जांच और सच्चाई को उजागर करने के लिए आरोपी से आमने-सामने पूछताछ जरूरी है।
ईडी ने खान और अन्य के खिलाफ उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा उनके और उनके कथित सहयोगियों के खिलाफ दर्ज 58 प्राथमिकियों का संज्ञान लेते हुए धनशोधन का मामला दर्ज किया है।
एजेंसी ने 28 अक्टूबर को कहा था कि उसने धनशोधन निरोधक कानून के तहत रामपुर में खान के मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की जमीन और इमारतों को कुर्क किया है। इन परिसंपत्तियों का मौजूदा बाजार मूल्य 1,170 करोड़ रुपये है।
एजेंसी ने आरोप लगाया कि सार्वजनिक कार्यों के लिए आवंटित सरकारी धन को निजी विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए इस्तेमाल किया गया। याचिका में खान पर राज्य के शहरी विकास मंत्री और उत्तर प्रदेश जल निगम के रूप में अपने प्रभाव का इस्तेमाल कथित अनियमितताओं को सुगम बनाने के लिए करने का आरोप लगाया गया है।
रामपुर विकास प्राधिकरण ने जुलाई में विश्वविद्यालय परिसर में 38 इमारतों को गिराने का आदेश दिया था, जिसके बाद विश्वविद्यालय ने अपील दायर की थी।
ईडी ने अगस्त में इस मामले में छापेमारी की थी और खान से पूछताछ भी की थी।










