चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) पहली बार स्वयं मैदान में कूद गए हैं। सोमवार को उन्होंने बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार के रूप में नामांकन किया। इस दौरान समर्थकों की बड़ी भीड़ जुटी थी। जीत के दावे भी किए।
नामांकन से पहले उनका जनसंपर्क शुरू हो गया था। रणनीति के अनुसार वे घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क करेंगे। बांकीपुर में यह उपचुनाव भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के विधानसभा से त्याग पत्र देने के कारण हो रहा है।
भाजपा के लिए यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि राज्य में इन दिनों भाजपा के नेतृत्व में बनी पहली सरकार का शासन है।
1995 से बांकीपुर में भाजपा का कब्जा
बांकीपुर और इससे पहले की पटना पश्चिम विधानसभा सीट पर 1995 से ही भाजपा का कब्जा है। नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा 1995 से 2006 तक पटना पश्चिम के विधायक थे। उनके निधन के बाद 2006 में हुए उपचुनाव में नितिन नवीन जीते।
परिसीमन के बाद 2010 में पटना पश्चिम का नाम बदल कर बांकीपुर हो गया। नितिन इस सीट पर भी लगातार जीतते रहे। उपचुनाव में भाजपा ने सामान्य कार्यकर्ता नीरज कुमार सिन्हा को अपना उम्मीदवार बनाया है। बांकीपुर का उपचुनाव नितिन नवीन की प्रतिष्ठा से भी जुड़ गया है।
हार की स्थिति में उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। यही स्थिति प्रशांत किशोर के लिए भी है। अबतक दूसरों को चुनाव लड़ाकर सरकार बनाने का श्रेय लेते रहे प्रशांत अगर चुनाव हारते हैं तो उनका रणनीति बनाने वाला व्यवसाय भी प्रभावित होगा।
2025 के विधानसभा चुनाव में वह यही कह कर उम्मीदवार नहीं बने कि उन्हें पार्टी के उम्मीदवारों के लिए काम करना है। उस समय राघोपुर विधानसभा क्षेत्र से उनके चुनाव लड़ने की चर्चा थी। 2025 में जसुपा 238 सीटों पर लड़ी थी। किसी सीट पर जीत नहीं हुई। उसे तीन प्रतिशत वोट मिला।
चुनाव परिणाम के बाद वे लंबे समय तक बिहार की राजनीतिक परिदृश्य से ओझल रहे। माना जा रहा है कि अगर उपचुनाव में उनकी जीत हो गई तो आनेवाले समय में विपक्ष की कमी को दूर करेंगे। लेकिन, हारे तो राजनीतिक रूप से उनका सक्रिय रहना भी कठिन हो जाएगा।











