देश में कोटा के बाद कोचिंग संस्थानों के सबसे बड़े हब के रूप में उभरे पटना में अब छात्रों की सुरक्षा को लेकर फायर विभाग बेहद सख्त रुख अपनाने जा रहा है। हाल ही में लखनऊ के एक कोचिंग संस्थान में लगी भीषण आग के बाद जागे अग्निशमन विभाग के मुख्यालय से लेकर अनुमंडल स्तर तक के अधिकारी अब पटना के कोचिंग सेंटरों की कुंडली खंगालने में जुट गए हैं।
इसी कड़ी में पटना जिला फायर अधिकारी रितेश पांडेय के नेतृत्व में एक बेहद आधुनिक और पारदर्शी योजना पर काम चल रहा है, जिसके तहत अब कोचिंग संस्थानों की फायर सेफ्टी का पूरा सच एक क्यूआर (क्यूआर) कोड में दर्ज होगा। फायर विभाग एक विशेष क्यूआर कोड तैयार करने की प्रक्रिया में है।
इस डिजिटल व्यवस्था के लागू होने के बाद कोचिंग संस्थानों की फायर सेफ्टी से जुड़ी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) पूरी तरह से डिजिटल हो जाएगी।
इसके तहत हर संस्थान के मुख्य द्वार या दीवार पर एक विशिष्ट क्यूआर कोड चस्पा किया जाएगा, जिसे स्कैन करते ही छात्र और अभिभावक यह जान सकेंगे कि वह संस्थान उनके बच्चों के लिए कितना सुरक्षित हैं।
इसके अतिरिक्त, 106 कोचिंग संस्थान ऐसे पाए गए हैं, जहां सुरक्षा के तय मानक पूरी तरह से फेल साबित हुए हैं। अब इस नई क्यूआर कोड व्यवस्था और निरंतर होने वाले औचक निरीक्षणों के जरिए विभाग इन खामियों को दूर कर छात्रों के लिए एक सुरक्षित माहौल तैयार करने की दिशा में बढ़ रहा है।
दो-तीन पन्नों के डिजिटल फार्म में दर्ज होगी पूरी कुंडली
इस नई व्यवस्था के तहत क्यूआर कोड के भीतर दो से तीन पन्नों का एक विस्तृत डिजिटल फार्म लिंक रहेगा। इस फार्म में कोचिंग संस्थान को अपनी सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी हर एक छोटी-बड़ी जानकारी पूरी सत्यता के साथ भरनी होगी।
इस फार्म में संस्थान का नाम, सटीक लोकेशन और उसके पंजीकरण की स्थिति स्पष्ट करनी होगी। इसके अलावा, कोचिंग कितने छोर की है, वहां कुल कितने छात्र पढ़ते हैं और आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए एंट्री व एग्जिट (प्रवेश और निकास) के कितने रास्ते हैं, इसकी जानकारी देनी अनिवार्य होगी।इसके अलावा सुरक्षा उपकरणों की वास्तविक स्थिति के बारे में भी जानकारी रहेगी।
सिर्फ डिजिटल कागजी दावों पर नहीं, मौके पर भी होगी जांच
सभी कोचिंग संस्थानों द्वारा इस क्यूआर कोड फार्म में सूचनाएं दर्ज करने के बाद, विभाग हर संस्थान के लिए एक यूनिक क्यूआर कोड जारी करेगा। इसे संस्थान के मेन गेट या दीवार पर लगाना अनिवार्य होगा, ताकि कोई भी छात्र या अभिभावक इसे अपने मोबाइल से स्कैन कर सुरक्षा मानकों की असलियत जान सके।
हालांकि, फायर विभाग केवल इन डिजिटल दावों के भरोसे नहीं बैठेगा। जिला फायर अधिकारी ने साफ किया है कि इस प्रक्रिया के साथ-साथ फायर विभाग की टीमें खुद मौके पर जाकर फिजिकल फायर ऑडिट भी करेंगी।
राहत की बात यह है कि यह अभियान किसी एक या दो दिन का नहीं, बल्कि अब सालभर अनवरत चलता रहेगा, जिससे संस्थानों पर लगातार दबाव बना रहे।











