बिहार के बेगूसराय में तेघड़ा का श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मेला उस वक्त और खास हो गया, जब मंच पर एक ह्यूमनाइड एआइ रोबोट ने भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह के लोकप्रिय गाने ‘तू लगावेलु जब लिपिस्टिक’ पर जमकर डांस किया। फूलों की माला और गमछा पहने रोबोट को ठुमके लगाते देखकर मेले में मौजूद लोग भी उत्सुकता से उसे देखने लगे।
रोबोट के ठुमकों ने खींची भीड़, फिर स्क्रीन पर शुरू हुआ साइबर पाठ
मेले में ह्यूमनाइड एआइ रोबोट और कुत्ते के आकार का एआइ रोबोट आकर्षण का केंद्र बने रहे। लेकिन इनका मकसद सिर्फ लोगों का मनोरंजन करना नहीं था।
दोनों रोबोट के साथ लगी एलईडी स्क्रीन के जरिए लोगों को आनलाइन ठगी, फर्जी लिंक, एपीके फाइल और ओटीपी साझा करने के खतरे के बारे में जानकारी दी गई।
‘लिपिस्टिक’ वाले गाने से लेकर साइबर ठगी तक, रोबोट ने बदला अंदाज
गाने की धुन पर हाथ-पैर हिलाकर डांस करने वाले रोबोट को देखकर बच्चे और युवा खासे उत्साहित दिखे। इसी आकर्षण के जरिए लोगों को इंटरनेट मीडिया के दुरुपयोग, डिजिटल फुटप्रिंट और एआइ व डीपफेक के बढ़ते खतरे के प्रति जागरूक किया गया। साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की जानकारी भी दी गई।
20-25 लाख का पैकेज छोड़ा, गांव को बनाया अपनी कर्मभूमि
इस अनोखी पहल के पीछे 26 वर्षीय शशांक शेखर हैं। सालाना 20 से 25 लाख रुपये के पैकेज वाली नौकरी छोड़कर वह गांव लौट आए। जुलाई 2026 में उन्होंने साइबर वाणी फाउंडेशन की शुरुआत की। उनका लक्ष्य कमाई से ज्यादा गांव-गांव तक साइबर सुरक्षा की समझ पहुंचाना है।
तीन दिन के लिए चार लाख में आए दोनों रोबोट
शशांक के अनुसार दोनों रोबोट कोयंबटूर की कंपनी रोबो मिरेकल से तीन दिनों के लिए करीब चार लाख रुपये में किराए पर मंगाया गया था।
उनका कहना है कि जिस घर तक मोबाइल और इंटरनेट पहुंच चुका है, वहां तक साइबर सुरक्षा की जानकारी भी पहुंचनी चाहिए।
अब तक विद्यालयों और विभिन्न संस्थानों में पांच हजार से अधिक बच्चों को साइबर सुरक्षा, एआइ और इंटरनेट के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में जागरूक किया जा चुका है।
दिल्ली की नौकरी छोड़ी, अब गांव-गांव पहुंचा रहे डिजिटल सुरक्षा का संदेश
काजी रसलपुर पंचायत के वार्ड संख्या आठ निवासी शशांक ने संत जोसेफ एकेडमी से दसवीं और राजस्थान से इंटर की पढ़ाई की। दिल्ली विश्वविद्यालय से 2022 में बीकॉम करने के बाद आइआइटी दिल्ली से डिजिटल मार्केटिंग में पीजी डिप्लोमा किया।
2022 से 2024 तक भोपाल में एजुकेशन सेक्टर और डिजिटल मीडिया में काम किया। इसके बाद साइबर पीस के साथ इंडियन आर्मी, दिल्ली पुलिस और राजस्थान पुलिस समेत विभिन्न संस्थानों के लिए डिजिटल मैनेजमेंट का काम किया।
एआइ से सैनिटाइजेशन मॉनिटरिंग एप भी बनाया
शशांक अब साइबर सुरक्षा के साथ एआइ के क्षेत्र में भी काम कर रहे हैं। उन्होंने दानापुर स्थित आर्मी कैंट में सैनिटाइजेशन मॉनिटरिंग के लिए एआइ आधारित एप्लीकेशन तैयार किया है। एप्लीकेशन का चयन हो चुका है और इसी महीने इसे रिलीज किए जाने की तैयारी है।
आगे इसे पेटेंट कराने की भी योजना है। उनका कहना है कि लक्ष्य व्यवसाय खड़ा करना नहीं, बल्कि बिहार के गांव-गांव तक डिजिटल सुरक्षा की समझ पहुंचाना है।











