बहराइच में साइबर धोखाधड़ी के लिए ऋण घोटाले का इस्तेमाल करने के आरोप में 13 गिरफ्तार

बहराइच जिले में एक गिरोह के 13 सदस्यों को कथित तौर पर ऋण हासिल करने में मदद करने के बहाने लोगों के बैंक खातों और बैंकिंग उपकरणों पर नियंत्रण करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

उन्होंने कथित तौर पर इन खातों का इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी के माध्यम से प्राप्त धन से जुड़े लेनदेन को करने के लिए किया।

पुलिस अधीक्षक (एसपी) विश्वजीत श्रीवास्तव ने कहा कि पुलिस ने पिछले चार दिनों में जिले में साइबर अपराध के चार मामले दर्ज किए हैं, जिसके बाद अलग-अलग अभियानों में कुल 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

सभी साइबर अपराधी बहराइच के विभिन्न थाना क्षेत्रों के निवासी हैं।

प्रारंभिक जांच से पता चला है कि आरोपी ऋण की व्यवस्था करने का वादा करके अनजान व्यक्तियों का विश्वास हासिल करेगा। अधिकारी ने बताया कि इसके बाद वे एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, चेक बुक और पीड़ितों के खातों से जुड़े अन्य बैंकिंग विवरण जैसे व्यक्तिगत सामान प्राप्त करेंगे।

उन्होंने कहा कि इन बैंक खातों और बैंकिंग उपकरणों का उपयोग बाद में साइबर अपराध के माध्यम से उत्पन्न धन से जुड़े अन्य संदिग्ध वित्तीय लेनदेन को स्थानांतरित करने, निकालने और करने के लिए किया गया था।

श्रीवास्तव के अनुसार, उपेंद्र सिंह (निवासी, दरगाह शरीफ क्षेत्र) और साहबुद्दीन (निवासी मोतीपुर थाना क्षेत्र) द्वारा 12 जुलाई को दर्ज किए गए दो मामलों में, पुलिस ने साइबर सेल की सहायता से उसी दिन (रविवार) आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया।

गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान मोनू मौर्य, साहिल बेग, फहीम, सौरभ मिश्रा, नूर अहमद, मोहम्मद आमिर, शकील अहमद और संतोष सिंह के रूप में हुई है।

एसपी ने बताया कि शिवराम शुक्ला और अनुपम पांडेय की शिकायत के आधार पर पुलिस ने 9 और 10 जुलाई को कोतवाली देहात और कोतवाली नगर थानों में दर्ज इसी तरह के दो मामलों से संबंधित पांच अन्य संदिग्धों को गिरफ्तार किया था।

इन आरोपियों की पहचान आशीष कश्यप, निहाल शर्मा, रवि कुमार और शंभू सोनी (निवासी कोतवाली देहात थाना क्षेत्र) और अर्जुन सिंह (निवासी नानपारा थाना क्षेत्र) के रूप में हुई है।

पुलिस ने कहा कि गिरफ्तार आरोपियों पर कानूनी मामलों में फंसकर पीड़ितों को धमकी देने और उन्हें शिकायत दर्ज करने से रोकने के लिए जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप है।

एसपी ने कहा कि बैंक स्टेटमेंट, डिजिटल साक्ष्य और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर धन के प्रवाह की विस्तृत जांच चल रही है।

गिरोह से जुड़े अन्य संभावित सहयोगियों, लाभार्थी बैंक खातों, साइबर नेटवर्क और संबंधित व्यक्तियों की भूमिकाओं की भी जांच की जा रही है।

उन्होंने कहा कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और सबूतों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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