बांका: ‘मम्मी-पापा मिलने नहीं आए तो…’, बाल्टी-कुर्सी लेकर कमरे में गई छात्रा, फिर झूल गई पंखे से

इंटरस्तरीय कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में सोमवार की सुबह दसवीं कक्षा की छात्रा मानको हेंब्रम ने पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। छात्रा दक्षिणी कस्बा वसीला पंचायत के पहाड़पुर गांव निवासी राम हेंब्रम की पुत्री थी।

घटना के बाद विद्यालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई। सूचना पर पुलिस, एफएसएल की टीम और शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की।

वार्डन अन्ना लकड़ा ने बताया कि सुबह करीब सात बजे प्रार्थना सभा के बाद सभी छात्राएं अपने-अपने कमरे में चली गईं। मानको अपनी चार सहेलियों के साथ दूसरी मंजिल के एक कमरे में रहती थी।

सहेलियों के अनुसार वह बाल्टी, कुर्सी और किताब लेकर पास के दूसरे कमरे में पढ़ाई करने की बात कहकर चली गई और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। कुछ देर बाद सहेली श्रीमती उसे बुलाने पहुंची। काफी आवाज देने के बाद भी जवाब नहीं मिला तो अन्य छात्राओं की मदद से दरवाजा तोड़ा गया।

अंदर मानको दुपट्टे के सहारे सीलिंग फैन से लटकी मिली। इसके बाद वार्डन ने तत्काल पुलिस को सूचना दी।

मृतका की मां के मुताबिक, रविवार को मानको ने अपने भाई को फोन कर कहा था कि यदि माता-पिता उससे मिलने नहीं आए तो सोमवार को वे उसका जिंदा चेहरा नहीं देख पाएंगे। किसी कारणवश स्वजन विद्यालय नहीं पहुंच सके थे। पुलिस इस बातचीत को भी जांच का महत्वपूर्ण आधार मानकर सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं

घटना के बाद थानाध्यक्ष श्रीकांत भारती, जिला शिक्षा पदाधिकारी दीप नारायण पंडित, डीपीओ मु. फारूक रहमान, जिला समन्वयक सुनीता कुमारी तथा विद्यालय संचालक प्रीति बाला ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। एफएसएल टीम ने साक्ष्य जुटाए। प्रारंभिक जांच में कोई सुसाइड नोट भी नहीं मिला है।

सीसीटीवी में बाल्टी, कुर्सी, किताब ले जाती दिखी

सीसीटीवी फुटेज में छात्रा सुबह करीब साढ़े सात बजे बाल्टी, कुर्सी और किताब लेकर कमरे में जाती दिखी है। करीब आठ बजे सहेलियों ने उसे फंदे से लटका पाया।

वार्डन ने बताया कि 200 छात्राओं वाले विद्यालय में नियमित रूप से केवल एक प्रतिनियुक्त शिक्षिका कार्यरत हैं। इससे साफ जाहिर है कि विभाग शिक्षा के नाम पर खानापूर्ति कर रहा है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। आत्महत्या के कारणों का अभी खुलासा नहीं हो सका है।

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