बिहार की सबसे चर्चित हो चुकी बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव अब दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। बीजेपी ने इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले में बड़े चेहरे के बजाय संगठन से निकले एक कार्यकर्ता पर भरोसा जताया है।
पार्टी ने अभिषेक कुमार उर्फ बंटी को मैदान में उतारा है, जिनका मुकाबला जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर से है। ऐसे में चुनाव अब सिर्फ दो उम्मीदवारों के बीच नहीं, बल्कि दो अलग-अलग राजनीतिक मॉडल के बीच भी माना जा रहा है।
26 साल का संगठनात्मक सफर, अब पहली बड़ी चुनावी परीक्षा
अभिषेक बंटी का भाजपा से जुड़ाव कोई नया नहीं है। वह वर्ष 1999 से पार्टी के साथ सक्रिय हैं और संगठन में कई जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।
मंडल अध्यक्ष से लेकर युवा मोर्चा के महानगर अध्यक्ष और प्रदेश उपाध्यक्ष तक का सफर तय करने के बाद अब उन्हें पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने का मौका मिला है।
मैट्रिक पास उम्मीदवार पर BJP का भरोसा
नामांकन पत्र में दी गई जानकारी के अनुसार अभिषेक कुमार ने बिहार बोर्ड से दसवीं तक पढ़ाई की है। उन्होंने वर्ष 2000 में दरभंगा के एक स्कूल से मैट्रिक परीक्षा पास की थी।
इसके बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई नहीं की, लेकिन संगठनात्मक राजनीति में लगातार सक्रिय रहे और पार्टी के भीतर अपनी पहचान बनाई।
करीब 20 लाख की संपत्ति, 10 लाख का कर्ज
चुनावी हलफनामे के अनुसार अभिषेक कुमार के पास लगभग 19.60 लाख रुपये की संपत्ति है, जबकि उनकी पत्नी के पास करीब 9.92 लाख रुपये की चल-अचल संपत्ति है।
हलफनामे में 10 लाख रुपये के कर्ज का भी जिक्र किया गया है। उनके पास एक कार, एक बाइक और विभिन्न बीमा योजनाओं में निवेश भी है।
सोने की चेन और अंगूठी भी चर्चा में
अभिषेक के चुनावी हलफनामे में उनके पास मौजूद आभूषणों का भी विवरण दिया गया है। उनके पास सोने की चेन और अंगूठी है, जबकि उनकी पत्नी के पास सोने और चांदी के आभूषण हैं।
हालांकि चुनावी चर्चा का केंद्र उनकी संपत्ति नहीं, बल्कि एक साधारण कार्यकर्ता से उम्मीदवार बनने का सफर बना हुआ है।
प्रशांत किशोर और रेखा गुप्ता से सीधी टक्कर
बांकीपुर उपचुनाव को बिहार की राजनीति का सेमीफाइनल माना जा रहा है। इस सीट पर जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर भी मैदान में हैं। जबकि आरजेडी से रेखा गुप्ता मैदान में है।
ऐसे में बीजेपी ने अनुभवी राजनीतिक रणनीतिकार के मुकाबले संगठन के पुराने और जमीनी कार्यकर्ता को उतारकर अलग संदेश देने की कोशिश की है।
बांकीपुर में सिर्फ चुनाव नहीं, संदेश की भी लड़ाई
यह सीट भाजपा नेता नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई है। पार्टी ने उनके करीबी माने जाने वाले अभिषेक पर भरोसा जताया है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि बांकीपुर की जनता बड़े चेहरे को तरजीह देती है या फिर संगठन से निकले उस कार्यकर्ता को, जो वर्षों से पार्टी के लिए काम करता रहा है।










