बिहार के बहुचर्चित टेंडर घोटाले में गुरुवार को अदालत में अहम घटनाक्रम देखने को मिला। निगरानी के विशेष न्यायाधीश अतुल कुमार सिंह की अदालत ने जेल में बंद ठेकेदार रिशुश्री की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी।
अदालत ने बुधवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था, जिस पर गुरुवार को आदेश सुनाया गया।
रिशुश्री को राहत नहीं, जेल में ही रहना होगा
जमानत याचिका खारिज होने के बाद फिलहाल रिशुश्री को जेल में ही रहना होगा। यह मामला राज्य के चर्चित टेंडर घोटाले से जुड़ा है, जिसकी जांच विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) कर रही है।
संजीव हंस की अग्रिम जमानत पर शुक्रवार को सुनवाई
इसी मामले में आरोपित आईएएस अधिकारी संजीव हंस की अग्रिम जमानत याचिका पर गुरुवार को सुनवाई नहीं हो सकी।
अब अदालत इस मामले में शुक्रवार को सुनवाई करेगी, जिस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता की याचिका पर फैसला सुरक्षित
मामले में जेल में बंद भवन निर्माण विभाग के सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता तारिणी दास की नियमित जमानत याचिका पर भी सुनवाई हुई।
विशेष लोक अभियोजक आनंदी सिंह ने जमानत का विरोध किया, जिसके बाद अदालत ने आदेश सुरक्षित रख लिया।
टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के आरोप
विशेष निगरानी इकाई ने राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप में मामला दर्ज किया था।
लंबी जांच के बाद एसवीयू ने आईएएस अधिकारी संजीव हंस समेत सात आरोपितों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है।
अब अदालत के अगले फैसले पर नजर
रिशुश्री की जमानत खारिज होने के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा संजीव हंस की अग्रिम जमानत याचिका को लेकर है।
शुक्रवार को होने वाली सुनवाई इस चर्चित मामले की दिशा तय करने में अहम मानी जा रही है।









