लुटेरों को भी लूट लेता था पटना का ये शातिर, STF ने दबोचा तो 22 करोड़ के सोना लूटकांड का खुला राज

अंतरराज्यीय गिरोह के एक बेहद अपराधी को पटना पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने दबोच लिया है। गिरफ्तार आरोपित बिक्रम साहनी उर्फ हुलुकवन आम लोगों या व्यवसायियों को ही निशाना नहीं बनाता था, बल्कि सोना लूटने वाले दूसरे लुटेरों से ही सोना और कैश लूटना था।

पटना जिले के टाप 10 अपराधियों की सूची में शामिल हुलुकवन 15 वर्षों से हत्या, लूट, डकैती और आर्म्स एक्ट जैसे संगीन मामलों में वांछित है। पुलिस ने इसे रामकृष्णानगर थाना क्षेत्र के जगनपुरा इलाके से गिरफ्तार किया है।

इसके पास से 3.05 लाख रुपये नकद, एक लैपटाप और दो मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। हुलुकवन केवल बिहार ही नहीं, बल्कि कई अन्य राज्यों व जिलों में सोना लूट और भीषण डकैती की वारदातों को अंजाम दे चुका है।

वह अलग-अलग राज्यों में बेनामी संपत्तियां खरीद रहा था। इसके साथ ही शेयर मार्केट (शेयर बाजार) में भी भारी निवेश कर रहा था। हाल ही में खगौल में हुए 22 करोड़ रुपये के सोना लूटकांड में भी उसे हिस्से के तौर पर जो 10 लाख रुपये मिले थे, उसमें तीन लाख रुपये उसने तुरंत शेयर बाजार में लगा दिए थे। बाकी की रकम से उसने घर के ऐशो-आराम के लिए टीवी, फ्रिज और एसी जैसे सामान खरीदे थे।

जेल की सलाखों के पीछे रची गई थी 22 करोड़ की साजिश

चार अप्रैल को खगौल में गुजरात के सोना कारोबारी के दो कर्मचारियों से करीब 15 किलो सोना लूटा गया था, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 22 करोड़ रुपये थी। हुलुकवन ने कुबूल किया है कि इस पूरी वारदात का ताना-बाना जेल के भीतर बुना गया था।

जेल में बंद अमरनाथ और आदित्य नामक अपराधियों ने दोस्ती होने के बाद इस बड़ी डकैती की रूपरेखा तैयार की थी। हुलुकवन इस पूरे घटनाक्रम में लाइनर और मददगार की भूमिका में था।

वारदात को अंजाम देने के लिए उसने ही मुख्य आरोपियों के साथ जाकर फर्जी कस्टम अधिकारी की ड्रेस और टोपी खरीदी थी। वारदात के बाद जब अपराधी कार से दिल्ली भाग रहे थे, तो हुलुकवन उनके साथ नोएडा तक गया था और वहां से अपनी हिस्सेदारी लेकर लौट आया था।

पहचान छिपाने के लिए नेपाल से कोलकाता तक बदलता रहा ठिकाना

मूल रूप से पटना के पीरबहोर थाना क्षेत्र के सब्जीबाग (दुरुखी गली) का रहने वाला बिक्रम उर्फ हुलुकवन बेहद शातिर दिमाग है। जब उसे भनक लगी कि पुलिस उसके करीब पहुंच चुकी है, तो उसने पटना छोड़ दिया।

पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए वह लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था। इस दौरान उसने दिल्ली, गुवाहाटी, नेपाल और कोलकाता में अपनी पहचान छिपाकर शरण ली। वह कोलकाता से पटना लौटने की फिराक में था, तभी पुलिस की टेक्निकल सर्विलांस टीम ने उसे ट्रेस कर लिया और धर दबोचा।

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