हरियाणा के सतर्कता ब्यूरो ने तोड़ा 10 साल का रिकॉर्ड, 21 अक्टूबर तक 171 ट्रैप मामले दर्ज

राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसवी एंड एसीबी) ने 2026 में एक नया बेंचमार्क स्थापित किया है, जिसने पिछले 10 वर्षों में एक ही वर्ष में दर्ज जाल मामलों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। 21 अक्टूबर, 2026 तक, सतर्कता ब्यूरो ने 171 ट्रैप मामले दर्ज किए थे, जो 2016 के बाद से किसी भी एक वर्ष में दर्ज की गई सबसे अधिक संख्या है। 2022 में दर्ज 170 ट्रैप मामलों का पिछला रिकॉर्ड भी इस साल पार हो गया है।

राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के प्रमुख डॉ. एएस चावला ने भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि जो लोग रिश्वत लिए बिना वैध सार्वजनिक कार्य करने से इनकार करते हैं, जानबूझकर लोगों को एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय में भागवाते हैं, और नागरिकों को परेशान करने के लिए अपने आधिकारिक पदों का दुरुपयोग करते हैं, उन्हें किसी भी गलत धारणा को दूर करना चाहिए कि वे कानून की पहुंच से बाहर हैं।

उन्होंने कहा, ‘ऐसे भ्रष्ट अधिकारी और कर्मचारी एसीबी के रडार पर हैं। जनता को परेशान करने वालों और रिश्वत मांगने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

डॉ. चावला के अनुसार, सरकार ने भ्रष्टाचार के मामलों में “शिकायत-से-कार्रवाई” प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया है। इसके परिणामस्वरूप भ्रष्टाचार से संबंधित मामलों की रिपोर्टिंग और पहचान में वृद्धि हुई है।

उन्होंने कहा, “ट्रैप ऑपरेशन्स में वृद्धि न केवल सरकार की सक्रिय निगरानी, बेहतर शिकायत-निवारण तंत्र, प्रभावी सुधार और भ्रष्टाचार से निपटने के लिए मजबूत राजनीतिक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति को दर्शाती है, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में बढ़ते जनता के विश्वास को भी दर्शाती है।

9 महीने में 191 आपराधिक मामले दर्ज

ब्यूरो ने 1 जनवरी से 30 सितंबर तक विभिन्न अधिकारियों, कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों के खिलाफ कुल 191 आपराधिक मामले दर्ज किए। इनमें से 155 ट्रैप केस थे, जिनमें कुल 172 आरोपी रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गए। पकड़े गए लोगों में 16 राजपत्रित अधिकारी, 131 अराजपत्रित कर्मचारी और 25 निजी व्यक्ति शामिल हैं।

अभियुक्तों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के संगत उपबंधों के अंतर्गत मामले दर्ज किए गए थे और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई की गई थी।

94 कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश

2026 के दौरान, ब्यूरो ने 30 सितंबर तक 88 नई जांच दर्ज की। इस बीच, 15 सितंबर तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कुल 61 जांच पूरी हो चुकी थी।

इन पूर्ण की गई जांचों में से 16 के आधार पर 74 राजपत्रित अधिकारियों और 20 अराजपत्रित कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। इसके अलावा 10 जांचों में सात राजपत्रित अधिकारियों, 16 अराजपत्रित कर्मचारियों और 40 निजी व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने की सिफारिश की गई थी।

डॉ. चावला ने कहा कि इन आंकड़ों से पता चलता है कि ब्यूरो न केवल रिश्वत के मामलों में कार्रवाई कर रहा है, बल्कि भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतों और अनियमितताओं की लगातार जांच कर रहा है और जहां भी आवश्यक हो, आगे की कार्रवाई की सिफारिश कर रहा है।

21 मामलों में 26 आरोपियों को सश्रम कारावास की सजा

ब्यूरो द्वारा दर्ज 21 आपराधिक मामलों में एक जनवरी से 30 सितंबर तक भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, 1988 के विभिन्न प्रावधानों के तहत 23 अधिकारियों या कर्मचारियों और तीन निजी व्यक्तियों सहित कुल 26 आरोपियों को कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी।

दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों में बिजली विभाग के पांच, पुलिस विभाग के छह, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के एक, सिंचाई विभाग के दो, शिक्षा विभाग के दो, आबकारी और कराधान विभाग के दो, राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग के दो, कौशल विकास विभाग के एक, हरियाणा वेयरहाउसिंग के एक और हरियाणा राज्य औद्योगिक और बुनियादी ढांचा विकास निगम के एक अधिकारी शामिल हैं।

डॉ. चावला ने कहा कि हरियाणा एसीबी सरकारी तंत्र के भीतर पारदर्शिता, जवाबदेही और अखंडता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *