असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाला एआईएमआईएम राजद पर किए उपकार का अब बदला चाह रहा। परोक्ष रूप से राजद नेतृत्व को इसका संदेश भेज दिया गया है, इस दावेदारी के साथ कि विधान परिषद की एक सीट के लिए इस बार एआईएमआईएम को महागठबंधन का समर्थन चाहिए।
एक संभावित सहयोगी की इस दावेदारी से राजद की रणनीति तात्कालिक रूप से कुछ उलझी हुई प्रतीत हो रही है।
हालांकि, पार्टी-जनों को आशा है कि पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद के स्वदेश वापसी के बाद यह मसला भी सुलझ जाएगा, जो अभी सिंगापुर में स्वास्थ्य के रुटीन चेक-अप के लिए गए हुए हैं। बहरहाल नेतृत्व के निर्देश पर कोई इस मुद्दे पर मुंह नहीं खोल रहा।
विधान परिषद की रिक्त 10 सीटों में से महागठबंधन के लिए इस बार मात्र एक सीट की गुंजाइश बन रही, बशर्ते कि एकजुटता बनी रहे। राज्यसभा की पांच सीटों के लिए हुए चुनाव के दौरान महागठबंधन के चार विधायक मतदान से अनुपस्थित रहे थे। उनमें राजद के एक विधायक के साथ तीन कांग्रेस से थे।
तब एआईएमआईएम के पांच विधायकों के वोट राजद प्रत्याशी डॉ. प्रेमचंद गुप्ता को मिले थे। हालांकि, वे पराजित हो गए, क्योंकि महागठबंधन एकजुट नहीं रह सका था।
एआईएमआईएम को अब उसी का प्रतिदान चाहिए। महागठबंधन के विधायकों को एकजुट रखने की चुनौती के बीच प्रतिदान की यह अपेक्षा राजद को धर्म-संकट में डाले हुए है।
विधानसभा में विपक्ष के सर्वाधिक 25 विधायक राजद के हैं। कोई दांव-पेच न हो, तो इस बार विधान परिषद की एक सीट पर विजय के लिए इतने ही विधायकों की आवश्यकता है। राजद की दावेदारी स्वाभाविक है, लेकिन अपने कुछेक विधायकों को लेकर पूरी आश्वस्ति भी नहीं।
कांग्रेस वैसे ही डंवाडोल है। ऐसे में एआईएमआईएम का साथ महत्वपूर्ण हो जाता है, जिनसे अपना मुंह खोल दिया है। उल्लेखनीय है कि इस चुनाव के लिए कोई ह्विप भी जारी नहीं हो सकता, जो अपने खाते के वोटों की गारंटी का एक आधार होता है।











