मुजफ्फरपुर में ‘डीपीएस’ नाम का खेल! 26 दिन बाद भी कार्रवाई अधर में

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) के नाम और लोगो का कथित रूप से गलत इस्तेमाल कर संचालित किए जा रहे स्कूलों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई अब तक आगे नहीं बढ़ सकी है।

जिलाधिकारी के निर्देश पर नोटिस जारी होने के 26 दिन से अधिक समय बीत जाने के बावजूद संबंधित स्कूलों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

जानकारी के अनुसार जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में 18 से अधिक विद्यालय डीपीएस के नाम और लोगो का उपयोग कर संचालित किए जाने की शिकायत सामने आई थी।

आरोप है कि इन स्कूलों द्वारा अभिभावकों और छात्रों को यह विश्वास दिलाया जा रहा था कि उनका संबंध प्रतिष्ठित डीपीएस समूह से है, जबकि इसके पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं थे।

मामले को लेकर हाजीपुर रोड के डीपीएस के प्राचार्य ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर शिकायत दर्ज कराई थी। पत्र में अभिभावकों से प्राप्त शिकायतों का उल्लेख करते हुए फर्जी तरीके से डीपीएस नाम और लोगो के उपयोग पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने जांच एवं आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया था। जिलाधिकारी के आदेश के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी कुमार अरविंद सिन्हा तथा सर्व शिक्षा अभियान के डीपीओ सुजीत कुमार दास ने नौ मई को संबंधित स्कूलों के संचालकों एवं प्रबंधकों को नोटिस जारी किया था।

नोटिस में तीन दिनों के भीतर सभी आवश्यक दस्तावेजों और साक्ष्यों के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था। साथ ही स्पष्ट चेतावनी दी गई थी कि यदि विद्यालय डीपीएस नाम और लोगो के उपयोग से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाए, तो उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि नोटिस जारी होने के बाद कई विद्यालयों ने अपना पक्ष और दस्तावेज विभाग को उपलब्ध करा दिया है, लेकिन अब तक जांच पूरी नहीं हो सकी है। विभागीय स्तर पर जवाबों की समीक्षा की प्रक्रिया जारी बताई जा रही है।

वहीं यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित विद्यालयों के खिलाफ मान्यता संबंधी कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं। वहीं, शिक्षा विभाग की ओर से अभी तक किसी विद्यालय के विरुद्ध अंतिम निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है।

जिला शिक्षा पदाधिकारी कुमार अरविंद सिन्हा ने बताया कि नोटिस प्राप्त करने वाले कई विद्यालयों की ओर से जवाब भेजा गया है। प्राप्त अभिलेखों और दस्तावेजों की समीक्षा की जा रही है। समीक्षा पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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