बिहार की मिट्टी में उगा दिए कश्मीर वाले सेब; एक ही बगीचे में 15 से ज्यादा विदेशी फल, स‍िवान के क‍िसान का कमाल

बिहार की मिट्टी में जहां पारंपरिक खेती को ही सुरक्षित माना जाता है। लेक‍िन सिवान के किसान ने यह सोच बदली है।

वहीं सिवान जिले के भगवानपुर हाट प्रखंड के किसान अरुण कुमार ने अपनी मेहनत और प्रयोगधर्मिता से बागवानी की नई मिसाल कायम कर दी है।

करीब 25 वर्ष पहले नाशपाती की खेती से शुरुआत करने वाले अरुण कुमार आज अपने बगीचे में सेब, ड्रैगन फ्रूट, एवोकाडो, स्ट्रॉबेरी और अंजीर जैसे फलों की सफल खेती कर रहे हैं।

आकर्षण का केंद्र बना बगीचा

भगवानपुर हाट के इस प्रगतिशील किसान का बगीचा अब क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र बन गया है। यहां पहुंचने वाले लोग एक ही परिसर में नाशपाती, सेब, ड्रैगन फ्रूट, चेरी, स्टार फ्रूट और व्हाइट एप्पल जैसे कई दुर्लभ फलों को देखकर हैरान रह जाते हैं।

खास बात यह है कि इनमें से कई फलों को बिहार की जलवायु के अनुकूल नहीं माना जाता, लेकिन अरुण कुमार ने लगातार प्रयोग और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर इन्हें सफल बना दिया।

अरुण कुमार बताते हैं कि बागवानी का शौक उन्हें अपने पिता स्वर्गीय अनिरुद्ध प्रसाद से विरासत में मिला। उनके पिता शिक्षक होने के साथ-साथ पेड़-पौधों और फूलों के बेहद शौकीन थे।

आज उसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए अरुण कुमार ने अपने दो एकड़ के बगीचे को फल विविधता का अनूठा केंद्र बना दिया है।

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(हरमन 99 किस्म का सेब।)

बेटे ने की है एग्रीकल्‍चर की पढ़ाई

उनके पुत्र सत्यम देव ने एमएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई की है, जिससे परिवार की खेती और बागवानी के प्रति प्रतिबद्धता साफ दिखाई देती है।

उनके बगीचे में नाशपाती की कई किस्मों के साथ बाबूगोशा, हरमन-99 और अन्ना किस्म के सेब, पीले और गुलाबी रंग के ड्रैगन फ्रूट, थाई एप्पल, कश्मीरी थाई एप्पल, एवोकाडो, आलूबुखारा, अंजीर, स्ट्रॉबेरी, लाल आंवला, माल्टा, चेरी और स्टार फ्रूट जैसे फल लगाए गए हैं।

पांच नाशपाती के पेड़ों से ही उन्हें हर वर्ष 2 से 4 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त हो रहा है। अरुण कुमार का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल फल उत्पादन नहीं, बल्कि किसानों को नई खेती के लिए प्रेरित करना है।

क्षेत्र के किसानों के लिए बने प्रेरणा

उनका मानना है कि यदि सही जानकारी, धैर्य और वैज्ञानिक तकनीक अपनाई जाए तो बिहार की मिट्टी में भी कई लाभकारी और नई फसलों की खेती संभव है।

स्थानीय शिक्षक विनय कुमार सिंह बताते हैं कि अरुण कुमार क्षेत्र में एक लगनशील और प्रगतिशील किसान के रूप में पहचान बना चुके हैं।

उनका बगीचा आज आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है, जहां प्रकृति, प्रयोग और परिश्रम का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

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