मध्य प्रदेश से राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद करने पर वरिष्ठ वकील व पार्टी नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इंटरनेट मीडिया एक्स पर पोस्ट किया कि चुनाव आयोग ने कोई निर्णय न लेने रणनीति अपनाई। इसके कारण एकतरफा परिणाम घोषित हो सका।
इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपनी टिप्पणी में सिंघवी ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी तिथियों का क्रमवार उल्लेख करते हुए आयोग की भूमिका पर निशाना साधा। सिंघवी ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन के नामांकन की अंतिम तिथि आठ जून थी। रिटर्निंग ऑफिसर ने नौ जून को उनका नामांकन रद किया। 10 जून को चुनाव आयोग ने बिना कोई टिप्पणी किए मामले की सुनवाई की।
नाम वापस लेने की अंतिम तिथि 11 जून थी। आयोग ने रिटर्निंग आफिसर के निर्णय को न तो पलटा और न ही उसे सही ठहराया। 12 जून को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए मामला सूचीबद्ध हुआ और आयोग ने बिना इसकी प्रतीक्षा किए शाम को ही निर्विरोध चुनाव घोषित कर दिया।
सिंघवी ने आगे कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर और हमारे संविधान के निर्माता केवल संवैधानिक टेक्स्ट लिख सकते थे, वे ऐसी पक्षपाती संस्थाओं में संवैधानिक भावना, निष्पक्षता और आज़ादी नहीं भर सकते थे।
भाजपा कार्यालय के बाहर लगा दिग्विजय का पोस्टर
उधर, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने, चुनाव आयोग द्वारा कोई व्यवस्था न देने और सुप्रीम कोर्ट को लेकर लगाए मिलीभगत के आरोप के विरोध में प्रदेश भाजपा कार्यालय के बाहर एक पोस्ट लगाया गया। इसमें बताया गया कि जब फैसला मन का न हो तो अदालत भी कटघरे में, ईवीएम गलत, चुनाव आयोग गलत, सरकार गलत और अब सुप्रीम कोर्ट भी गलत। पोस्टर को लेकर जब बात कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पता लगी तो उन्होंने इसे फाड़ दिया।











