पहले आंखें तरेरी गईं और मुश्कें तानी गईं। उसके बाद सुरक्षा में कटौती के बहाने दबाव बढ़ाने का प्रयास हुआ। विक्टिम कार्ड चलते हुए राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद बिना सुरक्षा बल के पटना की सड़कों पर भरी दोपहर विचरण किए। फिर भी सरकार अपने निर्णय से न पीछे हटी, न लालू परिवार पर पिघली-पसीजी।
अंतत: पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की ओर से उनके सचिव ने सरकार को पत्र लिखा। आग्रह यह कि राबड़ी जब तक विधान परिषद में हैं, तब तक इसी मनचाहे बंगले (10, सर्कुलर रोड) में रहने दिया जाए। उल्लेखनीय है कि विधान परिषद में राबड़ी का कार्यकाल छह मई, 2030 को पूरा होगा।
उल्लेखनीय है कि बंगला खाली करने की समय-सीमा 15 जून को पूरी हो चुकी है और नियमानुसार अब प्रशासनिक हस्तक्षेप हो सकता है। ऐसे में अनुनय के जरिये राबड़ी ने बचाव के लिए एक आड़ ले लिया है।
भवन निर्माण विभाग की ओर से उन्हें मिला यह तीसरा नोटिस था, जिसके बाद वे आगबबूला हुई थीं।
पहला नोटिस पिछले वर्ष नवंबर में ही मिला था। उसके जरिये उन्हें विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की हैसियत से 39, हार्डिंग रोड में जाने का निर्देश है। संभव है कि देर-सबेर राबड़ी 10, सर्कुलर रोड वाले बंगले को खाली कर दें, क्योंकि अंदरखाने पैकिंग आदि चल रही है।
मोह के दो कारण:
10, सर्कुलर रोड पिछले दो दशक से यह राजद की राजनीति का केंद्र रहा है। इसके प्रति लालू परिवार के मोह का दूसरा कारण इसे अपनी सुविधा के अनुसार व्यवस्थित कर लेना भी है। किडनी प्रत्यारोपण के बाद लालू को संक्रमण आदि से विशेष बचाव करना होता है।
इसके अलावा उनके लिए एक ऐसे कमरा चाहिए, जो अपेक्षित चिकित्सकीय उपकरणों के साथ सुसज्जित हो। वह कमरा एक तरह से आईसीयू सरीखा ही होता है। पत्र में इसका भी हवाला दिया गया है। आग्रह यह कि नए बंगले में ये सारी सुविधाएं अपेक्षित होंगी।











