खरीफ विपणन मौसम 2025-26 के तहत धान अधिप्राप्ति के बाद चावल की आपूर्ति में देरी को सहकारिता विभाग ने गंभीरता से लिया है। राज्य में 4.60 लाख किसानों से 36.78 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया है।
इसके एवज में राज्य खाद्य निगम को 24.95 लाख एमटी चावल की आपूर्ति होनी थी, लेकिन अब तक 23.42 लाख एमटी यानी 94 प्रतिशत चावल ही पहुंचा है। समीक्षा में 17 जिलों की आपूर्ति राज्य के औसत से कम मिली।
17 जिलों में धीमी रफ्तार
विभाग ने कम आपूर्ति वाले सभी 17 जिलों के जिला सहकारिता पदाधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही निर्धारित समय सीमा के भीतर लंबित चावल की आपूर्ति पूरी कराने का निर्देश दिया गया है।
विभाग ने साफ किया है कि लक्ष्य के अनुरूप चावल की आपूर्ति में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में निगरानी बढ़ाकर लंबित आपूर्ति जल्द पूरी कराने को कहा गया है।
अफसरों को 24 घंटे कैंप करने का निर्देश
बेगूसराय, भागलपुर, जमुई और समस्तीपुर को छोड़कर अन्य जिलों में 429 ऐसी समितियां चिन्हित की गई हैं, जहां पांच या उससे अधिक लाट चावल की आपूर्ति लंबित है।
विभाग ने संबंधित प्रखंड सहकारिता पदाधिकारियों को इन समितियों में 24 घंटे कैंप कर आपूर्ति सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है।
वहीं, 40 या उससे अधिक लाट चावल लंबित रहने वाले 31 प्रखंडों के प्रखंड सहकारिता पदाधिकारियों से भी जवाब मांगा गया है।
इन जिलों की समितियों पर खास नजर
अररिया, औरंगाबाद, बांका, भोजपुर, दरभंगा, बक्सर, जहानाबाद, कैमूर, कटिहार, लखीसराय, नालंदा, रोहतास, सहरसा, शिवहर, सुपौल और पश्चिमी चंपारण की कई समितियों में 10 या उससे अधिक लाट चावल लंबित हैं।
संबंधित जिलाधिकारियों से इन समितियों और उनसे जुड़े राइस मिलों का निरीक्षण कराने को कहा गया है, ताकि आपूर्ति में तेजी लाई जा सके।
विभाग अब लंबित चावल की आपूर्ति को लेकर जिम्मेदारी तय करने की दिशा में भी कार्रवाई कर रहा है।











