भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव इस वर्ष 04 सितंबर को मनाया जाएगा। जन्माष्टमी को लेकर प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार जन्माष्टमी पर सर्वार्थ सिद्धि योग और रोहिणी नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय भी तिथि, नक्षत्र और योग का ऐसा ही संयोग था। इसे ज्योतिष एवं धर्मशास्त्र में अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है।
पंडित कृष्णकांत आचार्य उर्फ शिरोमणि झा ने बताया कि इस संयोग में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना और व्रत करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। यह संतान सुख, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति के लिए भी विशेष फलदायी माना गया है।
मध्यरात्रि में होगा बाल गोपाल का महाभिषेक
मध्यरात्रि में शुभ मुहूर्त में बाल गोपाल का अभिषेक और आरती कर उन्हें माखन का भोग लगाया जाएगा। इधर, जमुई के विभिन्न जगहों पर श्रद्धालुओं के लिए आकर्षक झांकियां सजाई जा रही हैं। झूलनोत्सव आयोजित करने की तैयारी जोर-शोर से चल रही है। ढोल-गाड़े और शंखध्वनि के बीच मंदिर परिसर गूंजेगा।
भगवान को दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से पंचामृत स्नान कराया जाएगा। इसके बाद नए वस्त्र, मुकुट और बंसी धारण कराकर विशेष शृंगार किया जाएगा।
भगवान को 56 भोग के साथ धनिया पंजीरी और माखन-मिश्री का प्रसाद अर्पित किया जाएगा। स्थानीय प्रशासन की ओर से सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था और श्रद्धालुओं के दर्शन को लेकर भी विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।











