बिहार के असिस्टेंट प्रोफेसरों को बड़ी राहत: अब नौकरी के साथ भी पूरी कर सकेंगे PhD, राज्यपाल का बड़ा फैसला

राज्यपाल एवं कुलाधिपति सैयद अता हसनैन ने बुधवार को बिहार लोक भवन में सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ समीक्षा बैठक की और अकादमिक कैलेंडर, नए पाठ्यक्रम और उपयोगिता प्रमाण-पत्र आदि पर चर्चा होगी।

हाल में नए राजकीय डिग्री कालेजों में संविदा पर नियुक्त सहायक प्राध्यापकों की चर्चा के दौरान राज्यपाल ने कहा कि वैसे नए सहायक प्राध्यापक जो विभिन्न विश्वविद्यालयों में पीएचडी में नामांकित हैं एवं संविदा नियुक्ति में सफल हुए हैं, उनके लिए विशेष निर्देश जारी किया जाएगा, ताकि उन्हें पीएचडी

बीच में छोड़ना नहीं पड़े एवं वे अपनी संविदा नियुक्ति के साथ-साथ शोध कार्य भी ससमय पूरा कर सकें। बता दें कि इस आदेश से पीएचडी कर रहे सहायक प्राध्यापकों को बड़ी राहत मिली है।

हर विश्वविद्यालय में डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाने का आदेश

राज्यपाल ने कुलपतियों को निर्देश देते हुए कहा कि व्यवस्था में बड़े बदलाव की नहीं, बल्कि समय-समय पर जरूरी सुधार और बेहतर समन्वय की जरूरत है।

उन्होंने समर्थ पोर्टल के क्रियान्वयन को उच्च शिक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए इसका अधिकाधिक उपयोग करने तथा विश्वविद्यालयों के आंकड़ों के सावधानीपूर्वक सुरक्षित रखने पर जोर दिया ताकि भविष्य में डेटा के नुकसान या उसे दोबारा जुटाने की समस्या न हो।

उन्होंने कहा कि आगे चलकर समर्थ को सभी विश्वविद्यालयों की प्रमुख गतिविधियों के संचालन का मुख्य डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया जाना चाहिए। जेनरेशन-जी के संदर्भ में राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों को युवाओं की बदलती सोच और आकांक्षाओं को समझना होगा।

उन्होंने विद्यार्थियों के साथ संवाद के जरिए उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं को समझने तथा उनके लिए सकारात्मक माहौल बनाने पर जोर दिया।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों में पुस्तकालयों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि अच्छी और प्रभावी पुस्तकालय विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता का अहम हिस्सा है। उन्होंने विश्वविद्यालयों से पुस्तकालयों की सुविधाओं की समीक्षा करने को कहा।

राज्यपाल ने गोद लिये गांवों की मांगी सूचना

राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों की सामाजिक जिम्मेदारी पर भी जोर दिया। उन्होंने गांवों और संस्थानों को गोद लेने की पहल को आगे बढ़ाने तथा उसके विकास के बारे में जानकारी देने को भी कहा। उन्होंने टीबी मुक्त भारत और टीबी मुक्त बिहार अभियान में विश्वविद्यालयों की सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।

बैठक में शैक्षणिक सत्रों को नियमित करने, डिग्रियों को डिजिलाकर पर उपलब्ध कराने, परीक्षा व्यवस्था को सुचारु बनाने तथा विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता को विद्यार्थियों की संख्या के अनुरूप सुनिश्चित करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।

बैठक में राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह, राज्यपाल के शिक्षा सलाहकार प्रो.बिनोद कुमार त्रिपाठी समेत अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित थे।

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