मोहाली में एनआईए की एक विशेष अदालत ने गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज 2018 के एक मामले में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के अवंतीपोरा के तीन छात्रों को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
दोषियों की पहचान जाहिद गुलजार, यासिर रफीक भट और मोहम्मद इदरीस शाह के रूप में हुई है। अदालत ने उन्हें आपराधिक साजिश, यूएपीए के तहत अपराध और विस्फोटक अधिनियम के उल्लंघन का दोषी पाया। तीनों 10 अक्टूबर, 2018 को गिरफ्तारी के बाद से न्यायिक हिरासत में हैं।
हालांकि, अदालत ने एक अन्य आरोपी सुहैल अहमद भट को यह कहते हुए बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने में विफल रहा है।
यह मामला 10 अक्टूबर, 2018 को जालंधर में सीटी इंस्टीट्यूशन के शाहपुर परिसर के छात्रावास से हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक बरामद करने से संबंधित है। पुलिस ने परिसर में छापेमारी के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम देने की योजना बना रहे थे और आतंकवादी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद (एजीएच) से जुड़े थे। जांचकर्ताओं ने आरोप लगाया कि तीनों संगठन की गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए धन प्राप्त कर रहे थे और संस्थान के अन्य छात्रों को समूह में भर्ती करने का प्रयास कर रहे थे।
पंजाब पुलिस ने जालंधर के सदर पुलिस स्टेशन में एफआईआर नंबर 166/2018 दर्ज की थी और मामले की जांच शुरू की थी।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने एक एके राइफल, दो मैगजीन और 54 जिंदा कारतूस, दो मैगजीन के साथ एक मौसर पिस्टल और 31 जिंदा कारतूस और लगभग एक किलोग्राम विस्फोटक सामग्री बरामद की।
जांच में यह भी पता चला कि एजीएच के पूर्व प्रमुख जाकिर मूसा से संबंधित आरोपी यासिर रफीक भट ने कथित तौर पर विस्फोटक सामग्री हासिल करने और संस्थान में कश्मीरी छात्रों को संगठन में शामिल होने और इसकी गैरकानूनी गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।











