बिहार विधान परिषद में विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की मंत्री शीला कुमारी उस वक्त सवालों के घेरे में आ गईं, जब इंजीनियरिंग कॉलेज और पॉलिटेक्निक संस्थानों में खाली पदों को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब विपक्षी सदस्य को संतुष्ट नहीं कर सका।
मामला इतना बढ़ा कि सत्ता पक्ष के कई मंत्री और विधानपार्षद मंत्री के बचाव में आगे आए, लेकिन सवाल पूछने वाले महेश्वर सिंह का गुस्सा शांत नहीं हुआ।
महेश्वर सिंह ने साफ कहा कि उनका सवाल शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की बहाली की समयसीमा को लेकर था, लेकिन मंत्री की ओर से पढ़ा गया जवाब उनके सवाल का सीधा उत्तर नहीं देता।
उन्होंने आरोप लगाया कि सदन में वही जवाब पढ़ा जा रहा है, जो अधिकारियों की ओर से तैयार किया गया है और पहले ही सभी सदस्यों को उपलब्ध कराया जा चुका है।
मंत्री का जवाब सुनते ही महेश्वर सिंह ने पकड़ लिया मोर्चा
दरअसल, सौरभ कुमार और महेश्वर सिंह ने राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों और पॉलिटेक्निक संस्थानों में शिक्षकों तथा गैर-शिक्षण कर्मचारियों के खाली पदों का मुद्दा उठाया था।
सदस्यों का कहना था कि लंबे समय से पद खाली रहने के कारण संस्थानों में पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
इस सवाल पर विभागीय मंत्री शीला कुमारी ने सदन में विभाग की ओर से तैयार जवाब पढ़कर सुनाया।
जवाब पूरा होते ही महेश्वर सिंह ने सवाल उठाया कि उन्हें यह जानना है कि आखिर शिक्षकों की बहाली कब तक पूरी होगी।
उन्होंने कहा कि सदन को सिर्फ तैयार जवाब नहीं, बल्कि बहाली की स्पष्ट समयसीमा बताई जानी चाहिए।
जवाब के बीच कई मंत्री आए आगे, फिर बढ़ी सदन की गर्मी
महेश्वर सिंह की आपत्ति के दौरान मंत्री ई. शैलेंद्र कुमार, रमा निषाद समेत सत्ता पक्ष के कई सदस्य बीच में जवाब देने का प्रयास करने लगे।
इससे सदन में माहौल और गरमा गया। महेश्वर सिंह ने हस्तक्षेप कर रहे सदस्यों से कहा कि जब कोई सदस्य सवाल पूछ रहा है तो उसे पूरा जवाब मिलने दिया जाना चाहिए।
उन्होंने टोकाटाकी कर रहे सदस्यों से तीखे अंदाज में कहा कि सवाल कुछ और पूछा जा रहा है और जवाब कुछ और दिया जा रहा है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब सवाल पूछने वाला सदस्य खुद मौजूद है तो उसकी ओर से जवाब देने की कोशिश क्यों की जा रही है।
‘हम अनपढ़-गंवार थोड़े बैठे हैं’, बयान से मचा हंगामा
बहस के दौरान महेश्वर सिंह का गुस्सा और बढ़ गया। उन्होंने हस्तक्षेप कर रहे सदस्यों से कहा कि वे शांत बैठें और सवाल का जवाब देने की कोशिश न करें। इसी क्रम में उन्होंने कहा, ‘हम लोग अनपढ़-गंवार थोड़े बैठे हैं।’
उन्होंने नए मंत्रियों की ओर इशारा करते हुए यह भी टिप्पणी की कि वे पहली बार आए हैं और ‘लगे उड़ने’। इसके साथ ही उन्होंने एक कहावत का भी इस्तेमाल किया, जिस पर सदन में माहौल और गर्म हो गया।
अशोक चौधरी ने जताई आपत्ति, भाषा को लेकर उठाया सवाल
महेश्वर सिंह की टिप्पणी पर मंत्री अशोक चौधरी ने आपत्ति जताई। उन्होंने सदन में इस तरह की भाषा के इस्तेमाल को उचित नहीं माना।
इसके बाद महेश्वर सिंह ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनका मकसद किसी का अपमान करना नहीं है, बल्कि सवाल का सीधा और स्पष्ट जवाब हासिल करना है।
उन्होंने कहा कि जब कोई सदस्य सदन में सवाल पूछता है तो बीच में दूसरे सदस्यों को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उनका कहना था कि सवाल पूछने वाले सदस्य को जवाब सुनने और अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है।
‘ठेकेदारी अंदाज में बोलना उचित नहीं’, महेश्वर सिंह का पलटवार
बहस के दौरान महेश्वर सिंह ने सत्ता पक्ष के कुछ सदस्यों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ लोग बैठे-बैठे ‘ठेकेदारी अंदाज’ में बोलने लगते हैं, जो सदन की गरिमा के अनुरूप नहीं है।
इंजीनियरिंग कॉलेजों और पॉलिटेक्निक संस्थानों में खाली पदों से शुरू हुई चर्चा आखिरकार सदन में तीखी नोकझोंक तक पहुंच गई।
अब इस पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के खाली पदों पर बहाली कब तक पूरी होगी और क्या सरकार इसकी कोई स्पष्ट समयसीमा तय करेगी।











