आयकर विभाग की अन्वेषण इकाई पिछले तीन वर्षों में विदेश भेजी गई बड़ी रकम के मामलों की जांच कर रही है। इस दौरान संदिग्ध संस्थाओं के बड़े नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है।
जांच की एक कड़ी बिहार के चार्टर्ड अकाउंटेंट गौरव गुंजन से भी जुड़ी है। विभागीय जांच दल ने दानापुर स्थित उनके आवास और कार्यालय में कार्रवाई के दौरान विदेशों में रकम भेजने वाली दर्जनों फर्मों के लिए जारी फार्म 15सीबी प्रमाणपत्रों की जांच की।
बड़ी संख्या में प्रमाणपत्र संदिग्ध मिलने की बात
प्रारंभिक पड़ताल में बड़ी संख्या में प्रमाणपत्र संदिग्ध या फर्जी पाए जाने की बात सामने आई है। विभाग के प्रथम दृष्टया आकलन के अनुसार, इन प्रमाणपत्रों के आधार पर करीब 400 से 500 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा विदेश भेजे जाने की आशंका है।
हालांकि, विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही रकम और कथित अनियमितताओं का अंतिम आंकड़ा स्पष्ट होगा।
कई शहरों में 394 इकाइयों की जांच
आयकर विभाग ने पटना समेत मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, अहमदाबाद और चेन्नई सहित कई शहरों में स्थित 394 इकाइयों और 36 पेशेवरों के खिलाफ विस्तृत सत्यापन अभियान शुरू किया है।
इनमें 117 इकाइयां देश की स्थलीय सीमाओं से लगे राज्यों के जिलों में स्थित बताई गई हैं।
बड़ी विदेशी रकम भेजने वाली संस्थाएं जांच के दायरे में
जांच का मुख्य फोकस उन संस्थाओं और पेशेवरों पर है, जिनके माध्यम से बड़ी मात्रा में विदेशी रकम भेजे जाने के मामले सामने आए हैं।
जांच एजेंसी अब यह पता लगा रही है कि संबंधित फर्मों ने विदेशों में रकम भेजने के लिए किन दस्तावेजों और प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया।
फर्मों और पेशेवरों के संबंधों की पड़ताल
जांच में प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया और रकम भेजने वाली फर्मों के बीच संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है।
इसके अलावा संबंधित पेशेवरों की भूमिका और विदेशी लेनदेन के वास्तविक स्वरूप को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
क्या है फार्म 15सीबी
विदेश में रकम भेजने वाले कई मामलों में कर देनदारी से संबंधित प्रमाणपत्र के रूप में फार्म 15सीबी का इस्तेमाल किया जाता है।
आयकर विभाग की जांच में यदि इन प्रमाणपत्रों की सत्यता पर सवाल सामने आते हैं तो संबंधित लेनदेन और कर अनुपालन की भी विस्तृत जांच की जा सकती है।
जांच पूरी होने के बाद साफ होगी तस्वीर
फिलहाल आयकर विभाग विदेशी लेनदेन, प्रमाणपत्रों और संबंधित संस्थाओं के बीच कड़ियों की जांच कर रहा है।
विभागीय पड़ताल पूरी होने के बाद ही विदेश भेजी गई रकम और कथित अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।











