समस्तीपुर की हर पंचायत में खुलेंगे सुधा बिक्री केंद्र, 346 जीविका दीदियों को मिलेगा स्वरोजगार

जिले की ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और गांव स्तर पर गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जीविका एवं बिहार राज्य दुग्ध सहकारी संघ (कॉम्फेड) के संयुक्त तत्वावधान में जिले की सभी 346 पंचायतों में सुधा बिक्री केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

इस योजना पर कुल 2 करोड़ 59 लाख 50 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। प्रत्येक बिक्री केंद्र की लागत 75 हजार रुपये निर्धारित की गई है, जिसमें 60 हजार रुपये की सहायता राशि जीविका उपलब्ध कराएगी, जबकि शेष 15 हजार रुपये चयनित जीविका दीदी को स्वयं निवेश करने होंगे। यह योजना मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत संचालित की जा रही है।

लॉटरी से होगा केंद्र संचालिका का चयन

योजना के तहत जिले की प्रत्येक पंचायत से जीविका से जुड़ी पांच महिलाओं के आवेदन लिए जाएंगे। इसके बाद पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए लकी ड्रॉ के माध्यम से एक महिला का चयन किया जाएगा, जो पंचायत स्तर पर सुधा बिक्री केंद्र का संचालन करेगी। चयनित महिला को केंद्र संचालन के लिए आर्थिक सहायता के साथ आवश्यक मार्गदर्शन और प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि वह सफलतापूर्वक व्यवसाय संचालित कर सके।

दूध से लेकर आइसक्रीम तक मिलेंगे उत्पाद

सुधा बिक्री केंद्रों पर दूध, दही, घी, पनीर, लस्सी, छाछ, मिठाई, फ्लेवर्ड मिल्क, आइसक्रीम समेत सुधा के विभिन्न डेयरी उत्पाद उपलब्ध होंगे। योजना के तहत केंद्रों को उत्पादों के सुरक्षित भंडारण के लिए आवश्यक उपकरण, जैसे डीप फ्रीजर आदि भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को अपने ही पंचायत स्तर पर गुणवत्तापूर्ण डेयरी उत्पाद आसानी से मिल सकेंगे, वहीं महिलाओं को नियमित आय का नया माध्यम मिलेगा।

महिलाओं की आय बढ़ाने की पहल

जीविका के सूचना प्रबंधक संतोष कुमार ने बताया कि जिले की सभी पंचायतों में एक-एक सुधा बिक्री केंद्र स्थापित किया जाएगा। प्रत्येक पंचायत से पांच इच्छुक जीविका दीदियों के आवेदन लिए जाएंगे और लकी ड्रॉ के माध्यम से एक महिला का चयन किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि यह योजना महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और डेयरी उत्पादों की पहुंच गांव-गांव तक सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। योजना से बड़ी संख्या में जीविका दीदियां आत्मनिर्भर बनेंगी और उनके परिवार की आमदनी में भी वृद्धि होगी।

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