जहां कभी धूल का गुब्बार उड़ता था, अब वहां लोग बैठक सेल्फी खींच रहे हैं। दरअसल, मोतिहारी-चकिया एनएच स्थित परसौनीखेम टोल प्लाजा के समीप एनएचएआइ द्वारा अधिग्रहित खाली जमीन पर कल तक धूल उड़ती थी।
एनएचएआइ ने मियावाकी प्लाटेंशन अभियान के तहत इसे हरित क्षेत्र के रूप में विकसित कर आकर्षण का केंद्र बना दिया है। पूरा इलाका घनी हरियाली से भर गया है।
एनएचएआइ के निरंतर प्रयास से विकसित यह ‘मियावाकी फारेस्ट’ न केवल राष्ट्रीय राजमार्ग की सुंदरता को बढ़ा रहा है, बल्कि यात्रियों को स्वच्छ, ठंडा एवं अधिक सुखद वातावरण का अनुभव भी प्रदान कर रहा है।
यह ग्रीन हाईवे की अवधारणा और संकल्प को मजबूती प्रदान कर रहा है। मियावाकी तकनीक जापान की एक विशेष पौधारोपण पद्धति है, जिसमें कम स्थान पर अधिक संख्या में स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाए जाते हैं।
इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पौधे सामान्य पौधारोपण की तुलना में अधिक तेजी से विकसित होते हैं और कुछ ही वर्षों में घना एवं आत्मनिर्भर मिनी फारेस्ट तैयार हो जाता है।
बताया गया कि इस परियोजना के अंतर्गत 10 हजार से अधिक पेड़ लगाए गए हैं, जिनमें नीम, जामुन, अर्जुन, करंज, गुलमोहर, पीपल सहित कई स्थानीय प्रजातियों के पौधे शामिल हैं।
वर्तमान में यह हरित क्षेत्र प्रदूषण कम करने, धूल को नियंत्रित करने, वायु गुणवत्ता बेहतर बनाने तथा आसपास के तापमान को संतुलित रखने में सकारात्मक योगदान दे रहा है।
लंबे समय तक बने रहते टिकाऊ
एनएचएआइ के परियोजना निदेशक आशुतोष सिन्हा ने बताया कि मियावाकी तकनीक से विकसित वन क्षेत्र कम रखरखाव में भी तेजी से विकसित होते हैं तथा लंबे समय तक टिकाऊ बने रहते हैं।
उन्होंने कहा कि एक बार पौधों के अच्छी तरह विकसित हो जाने के बाद इन्हें बहुत कम देखभाल और सिंचाई की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय अधिकारी एनएल येवतकर के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में पर्यावरण संरक्षण और हरित राजमार्ग को बढ़ावा देने हेतु विभिन्न पहल लगातार संचालित की जा रही हैं। अन्य एनएच पर भी जमीन चिह्नित कर हरित क्षेत्र विकसित करने का काम किया जा रहा है।











