बिहार के 5 पुरातात्विक स्थलों का होगा कायाकल्प, मुख्यमंत्री ने एक्शन प्लान तैयार करने का दिया निर्देश

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार के प्रमुख पुरातात्विक स्थलों बोधगया, सुल्तानगंज, मंदार और विश्व प्रसिद्ध केसरिया स्तूप के संरक्षण, वैज्ञानिक सर्वेक्षण, उत्खनन एवं समग्र विकास के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया है।

सरकार का उद्देश्य इन धरोहरों के ऐतिहासिक महत्व को नए सिरे से स्थापित करते हुए उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आकर्षण का केंद्र बनाना है।

प्रतिनिधिमंडल ने किया सर्वे

देश के वरिष्ठ पुरातत्वविदों एवं विशेषज्ञों के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को मुख्यमंत्री को कैमूर जिला स्थित मां मुंडेश्वरी मंदिर परिसर तथा आसपास के क्षेत्रों के विस्तृत सर्वेक्षण की रिपोर्ट प्रस्तुत की।

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि मंदिर परिसर में बिखरे हजारों प्राचीन भग्नावशेषों का वैज्ञानिक पद्धति से पुनर्स्थापन, संरक्षण तथा प्रलेखन किया जा सकता है।

उससे यह संपूर्ण परिक्षेत्र भारतीय पुरातात्विक धरोहर के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित होगा। मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञों की अनुशंसा के अनुरूप चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया।

बैठक में कैमूर क्षेत्र के तिलहाड़ कुंड, करकटगढ़ तथा अन्य प्राकृतिक एवं प्रागैतिहासिक महत्व के स्थलों को एकीकृत रूप से विकसित करने की योजना पर भी विस्तार से चर्चा हुई। ये स्थल बनारस-कोलकाता एक्सप्रेस-वे से मात्र चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं।

ईको-टूरिज्म के रूप में होंगे विकसित

विशेषज्ञों ने बताया कि प्राकृतिक सौंदर्य, प्रागैतिहासिक महत्व और पुरातात्विक संभावनाओं से समृद्ध यह क्षेत्र बिहार के नए हेरिटेज एवं इको टूरिज्म सर्किट के रूप में विकसित हो सकता है।

इन स्थलों के वैज्ञानिक संरक्षण और व्यवस्थित विकास के बाद इन्हें यूनेस्को की विश्व धरोहर की संभावित सूची में सम्मिलित कराया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की धरती के नीचे अब भी अनेक महत्वपूर्ण पुरातात्विक धरोहरें सुरक्षित हैं, जिनकी वैज्ञानिक पहचान, उत्खनन और संरक्षण से राज्य के इतिहास के अनेक नए अध्याय सामने आ सकते हैं। इससे सांस्कृतिक पर्यटन को नई गति मिलेगी, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

महाबोधि परिसर का होगा लिडार-जीपीआर सर्वेक्षण

मुख्यमंत्री ने बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर परिसर और उसके आसपास अत्याधुनिक लाइट डेटेक्शन एंड रैगिंग (लिडार) तथा ग्राउंड प्रेनेट्रेशन रडार (जीपीआर) तकनीक से सर्वेक्षण कराने का निर्देश दिया। इन तकनीकों के माध्यम से बिना खोदाई किए भूमि के भीतर संभावित पुरातात्विक संरचनाओं और अवशेषों की वैज्ञानिक पहचान की जा सकेगी।

सुल्तानगंज-मंदार का होगा संरक्षण

बैठक में सुल्तानगंज और मंदार क्षेत्र के ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के स्थलों के संरक्षण, समेकन और समग्र विकास पर भी विशेष बल दिया गया।

केसरिया स्तूप का पूरा होगा वैज्ञानिक उत्खनन

मुख्यमंत्री ने विश्व के सबसे बड़े बौद्ध स्तूपों में से एक केसरिया स्तूप के शेष हिस्से के वैज्ञानिक उत्खनन का निर्देश दिया। अब तक इस विशाल स्तूप का केवल आंशिक उत्खनन हुआ है। पूर्व में इस स्तूप के उत्खनन एवं संरक्षण कार्य में डा. केके मोहम्मद की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

प्रतिनिधिमंडल के सदस्य

पद्मश्री डॉ. केके मोहम्मद (विश्व प्रसिद्ध पुरातत्वविद् एवं राम जन्मभूमि उत्खनन दल के सदस्य), प्रोफेसर डा. रजत सान्याल, कोलकाता इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर, प्रोफेसर अनिल कुमार (मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, बिहार विरासत विकास समिति तथा शांति निकेतन के यूनेस्को विश्व धरोहर परियोजना से जुड़े विशेषज्ञ), भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) पटना के अधीक्षण पुरातत्वविद् डा. हरिओम शर्मा, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह तथा कला संस्कृति एवं भवन निर्माण विभाग के सचिव प्रणव कुमार।

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