जिले के 195 जलक्षेत्रों का अब कायाकल्प होगा। इन्हें वेटलैंड क्लस्टर के रूप में विकसित कर मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और मछुआरों की आमदनी बढ़ाने की योजना तैयार की गई है।
इसके तहत छोटे-छोटे मत्स्यपालकों को सहकारिता के दायरे में लाकर संगठित किया जाएगा। साथ ही मछली पालन और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए उन्हें सरकारी सब्सिडी का लाभ भी दिया जाएगा।
इस दिशा में पहली बार सहकारिता विभाग के माध्यम से पहल की जा रही है। योजना के तहत जिले के सभी नौ प्रखंड में पैक्स स्तर पर विशेष फिशरी क्लस्टर तैयार किए जाएंगे।
इसके लिए मत्स्य पालन सहयोग समितियों का गठन किया जाएगा। जिले में पहले से गठित समितियों को भी सक्रिय और सशक्त बनाया जाएगा।
समितियों के माध्यम से जल क्षेत्रों का सामूहिक प्रबंधन, आधुनिक तकनीक से मछली पालन और उत्पादित मछलियों की बेहतर कीमत पर बिक्री की व्यवस्था विकसित करने पर जोर रहेगा।
इससे छोटे मत्स्यपालकों को बिचौलियों पर निर्भरता कम करने और सामूहिक रूप से आर्थिक लाभ हासिल करने का अवसर मिलेगा।
रेहु और कतला से मुंगेर की पहचान
जिले में रेहु और कतला मछली का पालन प्रमुखता से होता है। बेहतर वृद्धि और बाजार में मांग के कारण मत्स्यपालक इन प्रजातियों को प्राथमिकता देते हैं।
इसके अलावा मृगल, पंगास और कामन कार्प का भी पालन किया जा रहा है। वेटलैंड क्लस्टर विकसित होने से इन प्रजातियों के उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
हवेली खड़गपुर झील बनेगी आजीविका का आधार
हवेली खड़गपुर झील को जिले के बड़े वेटलैंड क्लस्टर के रूप में चिह्नित है। झील के जलक्षेत्र का बेहतर प्रबंधन कर इसे स्थानीय मछुआरों के लिए रोजगार और आय का प्रमुख साधन बनाने की योजना है।
जलस्रोतों के पुनर्जीवन के साथ मत्स्य उत्पादन बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
वेटलैंड क्लस्टर योजना को धरातल पर उतारने के लिए सहकारिता विभाग ने पहल शुरू कर दी है। सभी बीडीओ और पैक्स अध्यक्षों को इच्छुक मत्स्यपालकों का समूह बनाने के लिए निर्देशित किया गया है।











