स्थानीय किशोर न्याय परिषद (जेजेबी) को गुमराह कर खुद को नाबालिग साबित करने के खेल का बड़ा भंडाफोड़ हुआ है।
लड़की के अपहरण मामले के एक शातिर आरोपित ने उम्र कम दिखाने के लिए न सिर्फ कोर्ट में झूठा हलफनामा दिया, बल्कि स्कूल की मिलीभगत से तैयार जाली ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) भी पेश कर दिया।
मामला पकड़ में आने के बाद किशोर न्याय परिषद के बेंच क्लर्क मो. शाहिद ने नगर थाना में आवेदन देकर आरोपित सहित जालसाजी में शामिल लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है।
पुलिस ने मामले में तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस निरीक्षक राजीव रंजन ने बताया कि इस मामले में प्राथमिकी के आलोक तीन को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, चिरैया थाना कांड संख्या 126/22 (लड़की का अपहरण) से जुड़े वाद संख्या 3009/26 में लखौरा थाना के परेवा के आरोपित भोला कुमार उर्फ भोला साह ने खुद को नाबालिग घोषित करने की अर्जी दी थी।
इसके लिए उसने राजकीय मध्य विद्यालय, परेवा शिकारगंज का एक टीसी कोर्ट में दाखिल किया। उसमें उसकी जन्म तिथि 15 मई 2006 दर्शाई गई थी और दावा किया गया था कि उसने यहां कक्षा एक से आठ तक पढ़ाई की है।
ऐसे खुली जालसाजी की परतें
दस्तावेज के सत्यापन के लिए जेजेबी कोर्ट ने उक्त विद्यालय के प्रधानाध्यापक को पत्र निर्गत किया था। इसके बाद मंगलवार को स्कूल की प्रभारी प्रधानाध्यापिका नामांकन पंजी लेकर बोर्ड के समक्ष उपस्थित हुईं।
जब मजिस्ट्रेट व कर्मियों ने रजिस्टर को खंगाला तो सबके होश उड़ गए। पाया गया कि स्कूल की नामांकन पंजी को 24 अप्रैल 2014 को ही लाल स्याही से क्लोज कर बंद कर दिया गया था। इसके बाद अलग स्याही का इस्तेमाल कर बैकडेट में तीन अतिरिक्त छात्रों का नामांकन दर्ज किया गया था।
इन तीन जाली नामों में अंतिम से दूसरे स्थान पर आरोपी भोला कुमार का नाम जोड़ा गया था, जो पूरी तरह त्रुटिपूर्ण और संदेहास्पद पाया गया। इसके बाद स्कूल के लोगों पर भी कानूनी कार्रवाई की गई।











