Bihar Ration Card: कोसी-सीमांचल में 5.34 लाख राशन कार्ड लाभार्थी संदिग्ध, विभाग ने 3.80 लाख के नाम काटे

कोसी व सीमांचल में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग को पांच लाख 34 हजार 464 राशन कार्ड धारक को संदिग्ध मिले हैं। इन संदिग्धों के दस्तावेजों की जांच और पात्रता सत्यापन के बाद पिछले कुछ माह में अबतक तीन लाख 82 हजार 963 लोगों के नाम राशन कार्ड सूची से हटाए जा चुके हैं।

इनमें कई ऐसे लाभार्थी हैं जिनकी न्यूनतम आय में वृद्धि होने पर यह कार्रवाई की गई है। संदिग्ध की सूची में सबसे कम नाम सहरसा जिला में है तो सबसे अधिक कटिहार जिला का है।

राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे इस विशेष अभियान का उद्देश्य राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत केवल पात्र परिवारों को ही खाद्यान्न का लाभ सुनिश्चित करना है।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, संदिग्ध सूची में ऐसे लाभार्थियों को शामिल किया गया है जिनकी न्यूनतम आय अधिक हो गई है। परिवार के किसी सदस्य को सरकारी नौकरी हो गई, उनकी संपत्ति बढ़ी है या फिर जिन लड़की की शादी दूसरे जगह हो गई।

आधार कार्ड, पेन कार्ड आदि अभिलेख के आधार पर विसंगतियां पाने के बाद विभाग ने राशन कार्ड डेटाबेस का विभिन्न सरकारी रिकॉर्ड के साथ मिलान कराया। इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में ऐसे लोगों की पहचान हुई जो पात्रता की शर्तें पूरी नहीं करते थे, लेकिन वर्षों से सरकारी अनाज योजना का लाभ ले रहे थे।

इसके बाद संबंधित जिलों को नोटिस जारी कर जांच और सत्यापन का निर्देश दिया गया था। अधिकारियों का कहना है कि अभियान अभी जारी है और शेष मामलों की जांच पूरी होने के बाद अपात्र पाए जाने वाले अन्य नाम भी हटाए जाएंगे।

कोसी-सीमांचल बना सबसे बड़ा फोकस

सीमांचल और कोसी क्षेत्र लंबे समय से गरीबी और खाद्य सुरक्षा योजनाओं के बड़े लाभार्थी क्षेत्रों में शामिल रहे हैं। ऐसे में यहां बड़ी संख्या में संदिग्ध नाम मिलने के बाद सरकार ने सत्यापन प्रक्रिया को और तेज कर दिया है।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, अभियान से वास्तविक जरूरतमंद परिवारों के लिए खाद्यान्न आवंटन में पारदर्शिता बढ़ेगी। किशनगंज जिले में भी कार्रवाई का व्यापक असर देखने को मिला है।

जिला आपूर्ति पदाधिकारी दिलीप कुमार के अनुसार, जिले में अब तक 48 हजार से अधिक लाभार्थियों के नाम राशन कार्ड सूची से हटाए जा चुके हैं। शेष मामलों की जांच जारी है। वहीं, दूसरी ओर खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने सभी जिलों को पेंडिंग मामलों का शीघ्र निपटारा करने और पात्र लाभार्थियों की सूची को अद्यतन करने का निर्देश दिया है।

विभाग का मानना है कि इस अभियान से न केवल फर्जीवाड़े पर अंकुश लगेगा, बल्कि सरकारी खाद्यान्न का लाभ सही लोगों तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।

जिले का नाम संदिग्ध लाभुक की संख्या काटे गए नाम
किशनगंज 65,745 47,468
अररिया 78,577 64,550
पूर्णिया 1,05,490 66,267
कटिहार 1,12,438 75,507
सहरसा 19,787 15,656
सुपौल 84,950 64,811
मधेपुरा 67,477 47,794

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