प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), चंडीगढ़ ने कोटक महिंद्रा बैंक धोखाधड़ी मामले में नौ आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दर्ज की है और 131.13 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है, जिसमें 12.85 करोड़ रुपये की बैंक बैलेंस और 118.28 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति शामिल है।
यह मामला फर्जी दस्तावेजों और प्राधिकार का उपयोग करके खोले गए अनधिकृत बैंक खातों के माध्यम से नगर निगम, पंचकूला से संबंधित धन की कथित हेराफेरी से संबंधित है।
ईडी के अनुसार, कोटक महिंद्रा बैंक के तत्कालीन डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पुष्पिंदर सिंह ने नगर निगम के एक अधिकारी विकास कौशिक और बैंक कर्मचारी दिलीप राघव के साथ कथित तौर पर मिलीभगत कर नगर निगम के नाम पर दो अनधिकृत खाते खोले थे। बाद में एमसी के वास्तविक खातों से धन को फर्जी प्राधिकरण पत्रों का उपयोग करके इन खातों में स्थानांतरित किया गया था।
एजेंसी ने कहा कि पुष्पिंदर सिंह और उनकी पत्नी प्रीति ठाकुर द्वारा नियंत्रित खातों में स्थानांतरित करने से पहले कई व्यक्तियों और संस्थाओं के माध्यम से धन भेजा गया था। इस धन का इस्तेमाल कथित तौर पर लग्जरी वाहनों, घड़ियों और फर्नीचर सहित अचल और चल संपत्तियों को हासिल करने के लिए किया गया था।
ईडी ने कहा कि सिंह ने कथित रूप से गबन किए गए धन का उपयोग करके पोर्श केयेन, बीएमडब्ल्यू 740एलआई, बीएमडब्ल्यू एक्स7, बीएमडब्ल्यू 749आई, बीएमडब्ल्यू जेड 4, जीप रैंगलर, लैंड क्रूजर और एक हार्ले-डेविडसन मोटरसाइकिल सहित कई लक्जरी वाहन खरीदे। एजेंसी ने आरोप लगाया कि धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद उसने कई वाहन बेचे।
एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि सिंह ने धोखाधड़ी का पता चलने के बाद पंचकूला के सेक्टर 2 में अपनी बहन को संपत्ति बेच दी। इसमें इस सौदे को ‘राउंड ट्रिपिंग’ करार दिया गया है, जिसका उद्देश्य स्वामित्व छिपाना और धन शोधन रोकथाम अधिनियम के तहत संपत्तियों की कुर्की को रोकना है।
ईडी ने पंचकूला के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर जांच शुरू की है।











