अब जमीन की मापी (Bihar Jamin Mapi) कराना भी महंगा हो गया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जमीन की मापी के लिए नई शुल्क दरें निर्धारित कर दी हैं। विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, अब लोगों को पहले की तुलना में अधिक शुल्क लगभग दोगुना का भुगतान करना होगा।
विभाग के सचिव द्वारा जारी आदेश में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित किए गए हैं। अपर समाहर्ता रवि राकेश ने बताया कि विभागीय निर्देश के आलोक में सभी संबंधित अधिकारियों को नये दर के आधार पर मापी कराने का निर्देश दिया गया है।
ग्रामीण क्षेत्र में प्रति खेसरा एक हजार देय होगा शुल्क
नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रैयती भूमि की सामान्य मापी के लिए रैयत को प्रति खेसरा एक हजार रुपये शुल्क तय किया गया है, जबकि अधिकतम शुल्क चार हजार रुपये तक होगा।
पहले सामान्य मापी के लिए अधिकतम शुल्क एक हजार रुपये ही लिया जाता था। वहीं, तत्काल मापी की सुविधा के लिए प्रति खेसरा दो हजार रुपये तथा अधिकतम आठ हजार रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।
वहीं, विभाग ने नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत के लिए अलग मापी शुल्क निर्धारित किया है।
नगर निकाय क्षेत्रों में सामान्य मापी के लिए प्रति खेसरा दो हजार रुपये तथा अधिकतम आठ हजार रुपये शुल्क तय किया गया है, जबकि तत्काल मापी कराने पर अब प्रति खेसरा चार हजार रुपये और अधिकतम 16 हजार रुपये तक का भुगतान करना पड़ेगा।
दो दिनों के अंदर करनी होगी मापी
विभाग द्वारा जारी निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि अब जमीन मापी के लिए आवेदन पूरी तरह से ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। आवेदन संबंधित अंचल कार्यालय को प्राप्त होने के बाद उसे अंचल अमीन के पास भेजा जाएगा। संबंधित अमीन को दो दिनों के अंदर मापी की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
शुल्क का भुगतान भी ऑनलाइन माध्यम से ही करना होगा। दावा किया गया है कि नई व्यवस्था से रैयतों को अब अंचल कार्यालय और अमीन के यहां चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे तथा मापी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी। हालांकि, बढ़ी हुई शुल्क दरों को लेकर आम लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के निर्देशानुसार ई-मापी के शुल्क में वृद्धि की गई है। अधिसूचना जारी किए जाने के बाद इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। ऑनलाइन मापी की व्यवस्था लागू होने से लोगों को अब अंचल कार्यालयों का चक्कर लगाना नहीं पड़ रहा है। साथ ही मापी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और समयबद्ध हुई है। – रवि राकेश, अपर समाहर्ता
प्रखंडों में मापी के लिए प्राप्त आवेदनों की स्थिति
| क्र.सं. | प्रखंड | प्राप्त आवेदन | निष्पादन का प्रतिशत (%) |
|---|---|---|---|
| 1 | अमौर | 1042 | 92.28 |
| 2 | बैसा | 1087 | 85.39 |
| 3 | बनमनखी | 2673 | 57.44 |
| 4 | बीकोठी | 1349 | 71.30 |
| 5 | बायसी | 1451 | 85.89 |
| 6 | भवानीपुर | 1706 | 82.37 |
| 7 | डगरूआ | 876 | 87.50 |
| 8 | धमदाहा | 3213 | 77.90 |
| 9 | जलालगढ़ | 729 | 80.09 |
| 10 | कसबा | 3342 | 82.91 |
| 11 | केनगर | 1422 | 71.60 |
| 12 | पूर्णिया पूर्व | 1961 | 67.01 |
| 13 | रूपौली | 2754 | 71.71 |
| 14 | श्रीनगर | 1231 | 73.35 |











