नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मानक के तहत निर्धारित शिक्षक-छात्र अनुपात का संतुलन कायम करने के दायरे में जिले के तीन हजार से अधिक शिक्षक सरप्लस घोषित किए गए हैं।
उन्हें ई-शिक्षा कोष पोर्टल के माध्यम से सरप्लस होने का संदेश भेजा गया है। इस सूचना से शिक्षकों में हड़कंप मच गया है कि उनका स्थानांतरण या समायोजन वर्तमान विद्यालय से कितनी दूर, किस स्कूल में किया जाएगा।
सरप्लस शिक्षकों में सबसे अधिक संख्या पहली से पांचवीं कक्षा के प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों की है, जिनकी संख्या 1600 से अधिक है। इनमें से 800 केवल दरभंगा शहर के विद्यालयों में पदस्थापित हैं।
इसके अलावा, सदर, बहादुरपुर और हनुमाननगर प्रखंड के प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षक भी सरप्लस के दायरे में आए हैं।
विडंबना यह है कि शहर के सर्वोदय हाई स्कूल, विद्यापति हाई स्कूल, मारवाड़ी हाई स्कूल और तारालाही सहित कई प्लस टू हाई स्कूलों में ऐसे शिक्षकों को भी सरप्लस का संदेश मिला है, जो अपने विषय में अकेले शिक्षक हैं।
इन विषयों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या भी पर्याप्त है, फिर भी उन्हें सरप्लस में दिखाया गया है। प्लस टू के प्रभावित शिक्षकों की संख्या 400 से अधिक है।
नौवीं और दसवीं कक्षा के लिए विभिन्न विद्यालयों में पदस्थापित 154 से अधिक शिक्षकों को भी सरप्लस घोषित किया गया है।
पहली से आठवीं कक्षा तक संचालित मध्य विद्यालयों के 900 से अधिक शिक्षकों को भी सरप्लस होने का संदेश मिला है। अब वे भी चिंतित हैं कि विभाग उनके साथ क्या करेगा। कई शिक्षकों ने निकट के विद्यालयों में रिक्ति तलाश कर स्थानांतरण के लिए आवेदन करना शुरू कर दिया है।











