धनहा थाना क्षेत्र में छह साल पहले रीना देवी हत्याकांड संख्या 182/2020 में एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) रिपोर्ट समय पर न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किए जाने पर जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है।
शुक्रवार को अदालत ने पुलिस अधीक्षक, बगहा को पांच अगस्त तक हर हाल में एफएसएल रिपोर्ट न्यायालय में उपलब्ध कराने तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई कर इसकी जानकारी न्यायालय को देने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान अभियोजन अधिकारी मन्नु राव ने कहा कि मृतका रीना देवी के विसरा जांच की एफएसएल रिपोर्ट अब तक न्यायालय में प्रस्तुत नहीं की गई है। रिपोर्ट के अभाव में अभियोजन पक्ष के मामले पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है तथा इसका लाभ आरोपितों को मिल सकता है।
वहीं बचाव पक्ष ने दलील दी कि मामला लगभग छह वर्ष पुराना है और सभी गवाहों की गवाही पूरी हो चुकी है। ऐसे में एफएसएल रिपोर्ट की प्रतीक्षा किए बिना बचाव पक्ष को अपना साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यह अत्यंत नृशंस हत्या का मामला है। मृतका के दोनों हाथ और पैर काटकर अलग-अलग बोरे में भर दिए गए थे तथा शव को छिपाने के उद्देश्य से जलाने का भी प्रयास किया गया था। पुलिस ने अधजली अवस्था में शव बरामद किया था, जिसकी पहचान मृतका की मां ने गले में पहनी पीतल की चाभी से की थी।
आदेश में कहा कि विधि विज्ञान प्रयोगशाला, मुजफ्फरपुर ने 26 दिसंबर 2024 को ही एफएसएल रिपोर्ट बगहा पुलिस को भेज दी थी। इसके बावजूद करीब दो वर्ष बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत नहीं की गई।
न्यायालय ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए कहा कि इससे बगहा पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा होता है। अदालत ने आदेश की प्रति पुलिस अधीक्षक को भेजते हुए पूरे मामले की जांच कराने, दोषी अधिकारियों की पहचान कर उनके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई करने तथा पांच अगस्त तक एफएसएल रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
साथ ही आदेश की प्रति डीआइजी बेतिया को भी भेजने का निर्देश दिया गया है, ताकि हत्या जैसे गंभीर मामलों में पुलिस की संवेदनशीलता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।











